आगामी 20 जनवरी से शहर में होने वाले आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को हरिद्वार में सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से निर्मित चार धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कहा, आवेदन में दिए गए कारण और विशेष रूप से ‘कुंभ मेला’ जो 2021 में शुरू होगा। इस विचार के तहत राज्य को 31 मई 2021 तक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में हाईकोर्ट के आदेश के तहत अवैध निर्माण ढहाए जा रहे है। हरिद्वार में भी 30 से अधिक अवैध निर्माण पर कार्रवाई हुई है। हालांकि मेहता ने पीठ से कहा कि अगले वर्ष जनवरी में होने वाले कुंभ मेले को देखते हुए इन चार मंदिरों (अखाड़ों) को नहीं ढहाया जाए।

इस दौरान अखाड़ा परिषद की ओर से पेश वकील ने यह स्वीकार किया कि चारों निर्माण, सिंचाई विभाग की जमीन पर हुए हैं लेकिन यह कहा कि इन ढांचों को ढहाया नहीं जाना चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार मई, 2021 के अंत तक सभी धार्मिक स्थलों द्वारा अवैध कब्जे को खाली कराए।

जिन चार धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त किया जाना है, वे हैं’ निर्मोही अखाड़ा ’, ’निरमानी आदि अखाड़ा, ‘भैयादास दिगंबर अखाड़ा’ और ‘निरंजनी अखाड़ा’। जो हरिद्वार के बैरागी कैंप में है।

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