ट्रिपल तलाक कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर SC का मोदी सरकार को नोटिस

6:29 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक कानून की वैधता को चुनौती वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से इस मामले पर चार हफ्ते में जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई धार्मिक प्रैक्टिस को गलत करार/ अपराध करार दिया हो, जैसे दहेज/सती आदि, ऐसे में क्या इसे अपराध की सूची में नहीं रखेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाबंदी और अपराध घोषित होने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं। इसमें अधिकतम तीन साल की सजा भी है।

बता दें कि जमायत-ए-उलेमा हिंद और समस्था केरला जमीतुल उलेमा और एक अन्य ने तीन तलाक कानून को चुनौती दी। इस पर जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता के वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि इस कानून की वैधता को परखा जाए। इस कानून से मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को तीन साल तक की सजा समेत अन्य प्रावधान सही नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने ट्रिपल तलाक को गंभीर अपराध को दायरे में लाने के प्रावधान को असंवैधानिक करार देने की मांग की है।

तीन तलाक (मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 30 जुलाई को राज्यसभा में पास हो गया था। इस बिल के मुताबिक एक समय में तीन तलाक देना अपराध है। इसलिए पुलिस बिना वारंट के तीन तलाक देने वाले आरोपी पति को गिरफ्तार कर सकती है। एक समय में तीन तलाक देने पर पति को तीन साल तक कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट से ही उसे जमानत मिलेगी।

Loading...