सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता महमूद प्राचा ने 15 अगस्त को सीएए और एनआरसी के खिलाफ अलीगढ़ के ईदगाह मैदान में धरने की योजना बनाई है। जिसमे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के तीन छात्रों में शामिल होने की उम्मीद है, जो पहले जिले में भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे।

अलीगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रशासन को लिखा है, सुप्रीम कोर्ट के वकील की गतिविधियों के कारण जिले में एक गंभीर कानून-व्यवस्था के विघटन की संभावना के कारण, जिससे उत्तर प्रदेश में सीएए पर हिंसा फिर से फैल सके।

कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मीडिया समूह ऐसे हैं जो इन तीनों एएमयू छात्रों के संपर्क में हैं और सीएए की लपटों को भड़काने के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। अलीगढ़ की पूर्व मेयर शकुंतला भारती एएमयू कुलपति से पहले ही मिल चुकी हैं और उनसे इन तीनों छात्रों पर नजर रखने को कहा है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति तारिक मंसूर ने कहा कि विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र को किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक राजनीतिक और सामाजिक बहस में शामिल होने वाले छात्रों पर नजर रख रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके संस्था का नाम किसी भी तरह से कलंकित नहीं है।

आगरा जोन के एडीजी अजय आनंद ने इंडिया टुडे को बताया कि पुलिस को पहले से ही महमूद प्राचा की गतिविधियों के बारे में पता है और स्थानीय खुफिया इकाइयों को अलीगढ़ में आते ही उन पर नजर रखने के लिए कहा गया है। यदि वह किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि में शामिल पाया जाते है, तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

अमर उजाला से बातचीत में प्राचा ने कहा कि पिछले दिनों वह संविधान की रक्षा करने के मकसद से और आंदोलन खड़ा करने के संबंध में अलीगढ़ गए थे। जानकारी मिल रही है कि पुलिस उन लोगों को पूछताछ के नाम पर परेशान कर रही है जिन लोगों से वह जाकर मिले थे। उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह लिखकर दें कोई आंदोलन नहीं होगा। यह पूरी तरह कानून का उल्लंघन है। पुलिसकर्मी भूल गए हैं कि वह भी संविधान की शपथ लेकर अपने फर्ज को अंजाम देते हैं। लेकिन अब उत्पीड़न करने पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के संबंध में आंदोलन खड़ा करने के लिए 15 अगस्त से अच्छा दिन कोई नहीं हो सकता।

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