नई दिल्ली | नरेन्द्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बीपीएल कार्ड धारको के लिए जन धन योजना शुरू की थी. इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालो लोगो का जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोला जाना था. उस समय मोदी ने यह भी घोषणा की थी की जन धन खाताधारको को मुफ्त में एक लाख का जीवन बीमा भी दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री के एलान के बाद लोगो में जनधन खाते खुलवाने की होड़ मच गयी. पिछले ढाई सालो में करीब 25 करोड़ जन धन खाते खोले गए है. इतनी बड़ी संख्या में खाता खुलने की वजह से सभी बैंकों को मुसीबत का भी सामना करना पड़ रहा है. इतनी बड़ी संख्या में खुले खातो का परिचालन खर्च काफी ज्यादा आ रहा है. जिससे पहले ही बढे हुए एनपीए की मार झेल रहे बैंकों की हालत और खस्ता हो रही है.

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राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने बताया की जनधन खातो के परिचालन पर आ रहे खर्च का वर्ष वार और बैंक वार ब्यौरा नही रखा जाता है . लेकिन एसबीआई ने 31 दिसम्बर 2016 को जो सूचना दी है उसके अनुसार जनधन खातो पर करीब 774.86 करोड़ रूपए का खर्चा आया है. जो एनपीए की मार झेल रहे बैंकों के लिए काफी बड़ी रकम है.

दरअसल संतोष गंगवार से जनधन खातो के परिचालन में आ रहे खर्चे का ब्यौरा माँगा गया था. इसके अलावा उनसे पुछा गया की कितने जनधन खातो को जीरो बैलेंस की वजह से बंद किया गया. इसके जवाब में उन्होंने कहा की करीब 1 करोड़ खातो को बंद किया गया है. सार्वजनिक बैंकों, ग्रामीण बैंकों और 13 निजी बैंकों ने सूचना दी है कि 24 मार्च 2017 तक की स्थिति के अनुसार कोई भी ट्रांसेक्सन नही होने की वजह से 9252609 खाते बंद किये गए.

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