Friday, July 30, 2021

 

 

 

SBI में 400 करोड़ के घोटाले का खुलासा, सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा

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विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे भगोड़ों की सूची में तीन नाम और शामिल हो गए हैं। जो देश के बैंक को करोड़ों का चुना लगाकर फरार हो गए है। सीबीआई ने हाल में इनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार राम देव इंटरनेशनल के तीन प्रवर्तक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई वाले छह बैंकों के गठजोड़ के साथ 411 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद देश से फरार हो चुके हैं। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाल में इनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई की जांच में पता चला है दिल्ली में रहने वाले इस कंपनी के मालिक ने 6 बैंकों से उधार लिया था और साल 2016 से लापता है।

एसबीआई ने शिकायत में कहा है कि कंपनी की करनाल जिले में तीन चावल मिलें, आठ छंटाई और ग्रेडिंग इकाइयां हैं। कंपनी ने व्यापार केलिए सऊदी अरब और दुबई में कार्यालय भी खोले हुए हैं। एसबीआई के अलावा कंपनी को ऋण देने वाले बैंकों में केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और कॉरपोरेशन बैंक शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते अभी तक इस मामले में छापेमारी की कार्रवाई नहीं की गई है। जांच एजेंसी इस मामले में आरोपियों को समन की प्रक्रिया शुरू करेगी। अधिकारियो ने कहा कि यदि आरोपी जांच में शामिल नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ उपयुक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसबीआई की शिकायत के अनुसार इस कंपनी का खाता 27 जनवरी, 2016 को गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बन गया था।

एसबीआई से बैंकों का एक्सपोजर 414 करोड़ रुपये से 173 करोड़ रुपये, केनरा बैंक का 76 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का 64 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 51 करोड़ रुपये, कॉर्पोरेशन बैंक का 36 करोड़ रुपये और आईडीबीआई बैंक का 12 करोड़ रुपये है। CBI ने अब कंपनी, इसके डायरेक्टर नरेश कुमार, सुरेश कुमार, संगीता और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चला है कि मुस्सदी लाल कृष्णा लाल नामक कंपनी की डिफॉल्टर होने के बाद रामदेव इंटरनेशनल लिमिटेड को ट्रिब्यूनल में लाया गया था। ट्रिब्यूनल ने रामदेव इंटरनेशनल लिमिटेड के तीनों निदेशकों को तीन बार नोटिस भेजा, लेकिन उनका पता नहीं चला। दिसंबर, 2018 में ट्रिब्यूनल को जानकारी दी गई कि आरोपी दुबई भाग गए हैं और उनका पता नहीं लगाया जा सकता।

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