Tuesday, January 25, 2022

पीएम मोदी के बयान पर रिटायर्ड आर्मी अफसर बोला – मैंने डिटेंशन सेंटर में गुजारे 11 दिन….

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बवाल के बीच दिल्ली के रामलीला मैदान में सोमवार को पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि CAA से भारत में रहने वाले किसी मुस्लिम की नागरिकता जाने वाली नहीं है। यह एक झूठ जो कांग्रेस और अर्बन नक्सली फैला रहे हैं कि मुस्लिमों के लिए देश में डिटेंशन सेंटर बना है। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि देश में ऐसा कोई डिटेंशन सेंटर है ही नहीं।

पीएम मोदी के इस बयान पर अब गुवाहाटी स्थित सेवानिवृत्त सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह ने सवाल उठाए है। सनाउल्लाह ने कहा, जहां मैंने अपनी ज़िंदगी के 11 भयानक दिन गुजरे? अगर मुझे राज्य मशीनरी द्वारा डिटेंशन सेंटर में नहीं भेजा गया होता, तो शायद मैं मुस्लिम भी नहीं होता।

बता दें कि इसी साल मई महीने में कारगिल युद्ध में शामिल रहे सेना के पूर्व अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेज गया था। हालांकि कुछ दिन बाद ही उन्हें डिटेंशन सेंटर से रिहा कर दिया गया था। उनके परिवार ने विदेशी न्यायाधिकरण के इस फैसले के खिलाफ गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

खोपनिकुची में लगभग 40 किमी पश्चिम में रहने वाले सेक्सगेनरियन रेहात आली भी पीएम मोदी का बयान सुन कर हंस पड़े। रेहात ने कहा “पीएम सही कह रहे हैं। यह वास्तव में नरक है, डिटेंशन सेंटर नहीं है।” रेहात को 13 मई को गौहाटी उच्च न्यायालय ने भारतीय घोषित करने के बाद रिहा कर दिया। उनके बेटे लुकमान ने कहा “अब ऐसा लगता है कि मेरे पिता को जीवन का आनंद लेने के लिए पिकनिक पर भेजा गया था।”

13 अक्टूबर को तेजपुर डिटेंशन सेंटर में दो साल बिताने के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से मरने वाले दुलाल पॉल के परिवार ने कहा कि ऐसे केंद्रों इस देश में नहीं है ऐसा बोलकर उनकी मृत्यु का उपहास किया है। उनके तीन बेटों में से एक ने कहा “अगर कोई डिटेंशन सेंटर नहीं हैं, तो मेरे पिता को विदेशी घोषित किए जाने के बाद उन्हें वहां भेजा भी नहीं गया होगा। ऐसे में सरकार को उन्हें वापस जीवित करना चाहिए।”

मोदी सरकार ने दी थी राज्यसभा में 6 डिटेंशन सेंटर के बारें में जानकारी

कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने असम में गैरकानूनी तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों की नज़रबंदी के लिए संचालित छह शिविरों के बारे में जानकारी दी थी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि 2016 से इस साल 13 अक्टूबर तक असम के छह नज़रबंदी शिविरों में रखे गए 28 लोगों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में 988 विदेशी नागरिकों को रखा गया है।

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