तीन तलाक के खिलाफ सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली सायरा बानों ने केंद्र की मोदी सरकार से शरियत के दायरे में ट्रिपल तलाक पर कानून बनाने की मांग की.

उन्होंने कहा कि हम ये चाहते हैं कि जब सरकार तीन तलाक पर कानून बनाए तो वो शरीयत के मुताबिक हो और कानून में शरियत के हर कायदे-कानून का पालन किया जाए क्योंकि शरियत के हिसाब से बनने वाला तीन तलाक का कानून सबसे सटिक होगा.

हालांकि इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये एक राजनीतिक कदम है. जिसे गुजरात चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है.

बोर्ड के मेम्बर कमाल फारुकी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान से पढ़ने के जरूरत है। कोर्ट ने सरकार को कोई ऐसा कानून बनाने के निर्देश नहीं दिए हैं. ये सरकार का एक राजनीतिक दांव है, जोकि गुजरात चुनाव को देखते हुए किया जा रहा है.

उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि गुजरात चुनाव से पहले सरकार को कानून बनाने को लेकर कोई सुध नहीं थी. उन्होंने कहा कि हम पहले ही इसको लेकर कानून बना चुकें हैं और अगर सरकार तीन तलाक पर कानून बनाएगी तो हम इसका सामाजिक बहिष्कार करेंगे.

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