मालेगांव ब्लास्ट मामलें में  बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत दे दी है. लेकिन सह आरोपी और पूर्व कर्नल प्रसाद पुरोहित को कोई राहत नहीं मिली हैं.

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति शालिनी फनसाल्कर जोशी की खंड पीठ की और से मिली यह जमानत सशर्त है. साध्वी प्रज्ञा को इसके एवज में अपना पासपोर्ट एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट में जमा कराना होगा. साथ ही पांच लाख रुपए की जमानत भी अदा करनी होगी. जस्टिस रंजीत मोरे और शालिनी फणसलकर जोशी की बेंच ने अपने फैसले में कहा, ‘पहली नजर में साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.’

एनआईए के वकील संदेश पाटिल ने कोर्ट में दलील दी कि इस ‘मामले में दायर आरोप पत्रों से यह तथ्य स्थापित होता है कि पुरोहित इस धमाके की साजिश में शामिल थे. उन्होंने न सिर्फ इससे जुड़ी बैठकों में हिस्सा लिया, बल्कि भड़काऊ भाषण भी दिए. साथ ही, धमाके के लिए विस्फोटक आदि का इंतजाम करने पर भी राजी हुए.’ जिस पर खंडपीठ ने कहा कि पुरोहित की ओर से दायर अपील को खारिज किया जाता है.

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गौरतलब रहें कि महाराष्ट्र के मालेगांव के अंजुमन चौक तथा भीकू चौक पर 29 सितंबर 2008 को बम धमाके हुए थे जिनमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 घायल हो गए थे. इन धमाकों में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी. इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते ने की थी, जो बाद में एनआईए को सौंपी गई थी.

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