ind muslim

देश के अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के आर्थिक, सामाजिक और पिछड़ेपन को लेकर बनाई गई सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को दस साल का लम्बा अरसा गुजर चूका हैं. लेकिन इन दस सालों में मुसलमानों के हालात जस के तस बने हुए हैं. उनकी आर्थिक, सामजिक और पिछड़ेपन में कोई सुधार नहीं आया हैं.

10 वर्ष पहले सच्चर कमेटी की 403 पन्नों की रिपोर्ट को 30 नवंबर 2006 को संसद में पेश किया गया था. इस रिपोर्ट में मुसलमानों के हालात दलितों से भी बदतर बताए गए थे. लेकिन 10 वर्ष के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ हैं. पिछले दस सालों में मुस्लिम आईएएस और आईपीएस की संख्या भी कम हो गई.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार देश में 3 फीसदी आईएएस और 4 फीसदी आईपीएस अधिकारी मुस्लिम थे. लेकिन 2016 में गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 3.32 और 3.19 हो गया. इसके साथ ही सच्चर रिपोर्ट ने बताया था कि 7.1 प्रतिशत प्रमोटी आईपीएस मुस्लिम थे लेकिन ये अब सिर्फ 3.82 प्रतिशत रह गए हैं.

इसके अलावा पुलिस विभाग में भी मुस्लिम पुलिसकर्मियों की संख्या में भारी गिरावट नजर आ रही हैं. देश भर में पुलिस में मुसलमान पुलिसकर्मी 7.63 फीसदी थे लेकिन यह घटकर साल 2013 में 6.27 फीसदी हो गई. इसके बाद सरकार ने धर्म के आधार पर पुलिसकर्मियों का आंकड़ा जारी करना बंद कर दिया.

Loading...