नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं मिल रहा है।लगातार तीन दिनों से विभिन्न संगठनों द्वारा मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने से रोका जा रहा है। इस दौरान मंदिर के आस-पास लगातार हिंसा का माहौल बना हुआ है।

शुक्रवार को भारी सुरक्षा के बीच पुलिस हेलमेट पहनाकर मंदिर की तरफ ले जा रही दो महिलाओं प्रदर्शनकारियों  ने रोकने के लिए नारेबाजी और हंगामा किया। जिसके बाद दोनों महिलाओं को आधे रास्ते से वापस लौटा दिया गया, महिलाएं मंदिर के पास पहुंच गई थीं। इनमें हैदराबाद के मोजो टीवी की पत्रकार कविता जक्कल और सामाजिक कार्यकर्ता रिहाना फातिमा शामिल थीं जिन्हें पुलिस पंबा से सन्निधानम ले जा रही थी।

केरल पुलिस के आईजी श्रीजीत ने कहा, ‘‘पुलिस सबरीमाला में किसी तरह का टकराव नहीं चाहती, खासकर श्रद्धालुओं के साथ तो बिलकुल नहीं। पुलिस केवल कानून का पालन कर रही है। हम दोनों महिलाओं को दर्शन कराने के लिए लेकर गए थे, लेकिन पुजारियों ने मंदिर में प्रवेश देने से मना कर दिया। उन्होंने मुझे बताया कि अगर हमने मंदिर आने की कोशिश की तो वे मंदिर को बंद कर देंगे।’’

सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंडारू राजीवारू ने आईजी के बयान की पुष्टि की और कहा कि अगर महिलाएं जबर्दस्ती प्रवेश करने की कोशिश करेंगी तो हम मंदिर को ताला लगाकर चाबी सौंप देंगे। हम श्रद्धालुओं के साथ हैं। हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।

इस बीच, रेहाना फातिमा के सबरीमाला मंदिर के करीब पहुंचने से गुस्साए कुछ लोगों ने काेच्चि में उनके घर में तोड़फोड़ कर दी। उनके घर के शीशे तोड़ दिए गए और सामान निकालकर बाहर फेंक दिया गया। प्रदर्शनकरियों ने रेहाना फातिमा के  घर के बाहर मौजूद गमले आदि तोड़-डाले।

रेहाना ने कहा- ‘‘हमारा विरोध श्रद्धालु नहीं कर रहे, बल्कि दूसरे लोग कर रहे हैं जो शांति में अवरोध पैदा करना चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि विरोध की वजह क्या है। श्रद्धालु होने की क्या शर्तें हैं?’’ कविता ने कहा, ‘‘हमारा सपोर्ट करने वाले लोगों का हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। हमें यहां आकर गर्व महसूस हो रहा है, क्योंकि सबरीमाला मंदिर के आसपास की स्थिति खतरनाक है।’’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। मंदिर में प्रवेश को लेकर हुई हिंसा के लिए राज्य के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया है।