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मुंबई | पिछले साल 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर करने का एलान किया था. इसके अलावा उन्होंने नए 500 और 2000 के नोट जारी करने की भी सूचना दी थी. तब पीएम ने दलील दी थी की बड़े नोटों से कलाधन और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है इसलिए इन नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है. हालाँकि सरकार की और से कभी इस सवाल का जवाब नही दिया गया की आखिर 1000 के नोट से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है तो 2000 के नोट से वह कैसे रुकेगा?

फ़िलहाल नोट बंदी हुए करीब एक साल हो चूका है. इस एक साल की अवधि में नए 500 और 2000 के नोट काफी चलन में आ चुके है. इसके अलावा आरबीआई ने 200 रूपए के भी नए नोट जारी कर दिए है. 200 के नए नोट से बाजार में खुले पैसो की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है. लेकिन एक आरटीआई ने 200 और 2000 के नए नोटों को लेकर एक चौकाने वाला खुलासा किया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरबीआई ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है की उसके पास नए नोट जारी कररने का अधिकार नही है. आरटीआई में खुलासा हुआ है की आरबीआई के पास यह प्रमाणिक करने का कोई भी अधिकारिक दस्तावेज नही है की नोट बंदी के बाद उसको नए 200 और 2000 के नोट जारी करने का अधिकार था. यही नही नोट छपवाने को लेकर भी कोई सर्कुलर जारी नही किया गया.

मुंबई के एक्टिविस्ट एमएस रॉय की आरटीआई के जवाब में यह सूचना दी गयी. रॉय के अनुसार आरटीआई में बताया गया है की 19 मई 2016 का एक दस्तावेज दिखाता है कि आरबीआई के कार्यकारी निदेशक द्वारा 18 मई 2016 को एक प्रस्ताव पेश किया गया था जो नए नोट के डिजाईन , पैमाने और मूल्यों से सम्बंधित था. इस प्रस्ताव को निदेशक मंडल ने मंजूरी देकर केंद्र सरकार के पास भेज दिया.

रॉय ने आगे बताया के आरबीआई बोर्ड के प्रस्तावों में 1000, 2000 और 200 रूपए के नए नोटों के डिजाईन या महात्मा गाँधी की तस्वीर को छापने को लेकर कोई चर्चा नही हुई. इसलिए नए नोटों को जारी करने की भी कोई मंजूरी नही दी गयी. इसलिए सवाल है की नए नोटी को किसने डिजाईन किया और बिना मंजूरी के ये कैसे छापे गए? रॉय ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है.