सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर उठे सवालों के चलते देश की न्यायिक व्यवस्था शंकाओ के घेरे में आ गई है. इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) खुलकर चीफ जस्टिस के समर्थन में आ गया है.

सीजेआई दीपक मिश्रा को राष्ट्रवादी करार देते हुए स्वदेशी जागरण मंच के को-कनविनर अश्विनी महाजन ने ट्वीट कर कहा, उन्होंने लिखा – याकूब मेनन को फांसी इन्होंने सुनाई थी, सिनेमा में राष्ट्रगान इन्होंने ही बजवाया था, निर्भया गैंग रेप में तीनों आरोपियों को फांसी इन्होंने सुनाई थी, ऑनलाइन एफआईआर दिल्ली पुलिस से इन्होंने करवाई थी, अयोध्या राम मंदिर मामले में भी यही सुनवाई कर रहे हैं.

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उन्होंने आगे लिखा कि ऐसे राष्ट्रवादी चीफ जस्टिस के खिलाफ वामपंथियों की साजिश तो बनती है न, ऊपर से कांग्रेस का उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगना, यह कोई छोटी साजिश नहीं हो सकती. महाजन ने जस्टिस रंजन गोगोई के ‘कोई क्राइसिस नहीं है’ वाले बयान पर भी सवाल उठाया और कहा कि अब कहा जा रहा है कि कोई क्राइसिस नहीं है, तो कई हजार टन न्यूजपेपर क्यों बर्बाद किया गया.

संघ के सीनियर प्रचारक और प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार ने ट्वीट किया कि कोड ऑफ जुडिशल एथिक्स क्या कहते हैं. इसमें उस पॉइंट को हाइलाइट किया गया है जिसमें लिखा है कि ‘जज पॉलिटिकल मामलों में और ऐसे मामलों में जो पेंडिंग हैं, पर पब्लिक डिबेट नहीं कर सकते और अपने विचार पब्लिक में जाहिर नहीं कर सकते.’ दूसरा पॉइंट जो हाइलाइट किया गया है उसमें लिखा है कि ‘जज मीडिया में इंटरव्यू नहीं दे सकते.’

ध्यान रहे जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने प्रेस कांफ्रेंस कर चीफ जस्टिस पर अपनी शक्तियों के दुरूपयोग का आरोप लगाया है. साथ ही कहा कि न्यायपालिका खतरे में है अगर न्यायपालिका को नहीं बचाया गया तो लोकतंत्र भी नहीं बचेगा.

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