Friday, July 30, 2021

 

 

 

RSS वाले वेदों को नहीं मानते, इसलिए हिन्दू ही नहीं: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

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हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को न केवल हिन्दू संगठन मानने से इंकार कर दिया बल्कि साफ शब्दों में कहा कि संघ और इसके लोग वेदों में विश्वास नहीं करते हैं, और जो वेदों पर विश्वास नहीं करता वो हिंदू नहीं हो सकता है।

टीवी-9 को दिए साक्षात्कार में उन्होने कहा, ‘उनका एक ग्रंथ है विचार नवनीत, जो गोलवलकर जी का लिखा हुआ है।  उन्होंने ये बताया है कि हिंदुओं की एकता का आधार वेद नहीं हो सकता। यदि वेद को हम हिंदुओं की एकता का आधार मानेंगे तो जैन और बौद्ध हमसे कट जाएंगे। वो भी हिंदू हैं।”

शंकराचार्य ने कहा कि वो ये मानते हैं कि जो वेदों के धर्म-अधर्म पर विश्वास रखता है वही हिंदू है। वेद-शास्त्रों में जो विधिशेध हैं। उनको जो मानता है उसी को आस्तिक माना जाता है, और जो आस्तिक होता है वही हिंदू होता है।’

गौरतलब है कि शंकराचार्य भोपाल से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर भी तंज कस चुके हैं। पूर्व में एक बयान देते हुए उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर साध्वी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर वो साध्वी होती तो अपने नाम के पीछे ठाकुर क्यों लिखतीं।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कह चुके हैं कि प्रज्ञा ठाकुर साध्वी नहीं हैं। अगर वे साध्वी होती तो अपने नाम के पीछे ठाकुर क्यों लिखती। उन्होंने कहा साधू-साध्वी होने के मतलब है ऐसे व्यक्ति की सामाजित मृत्यु हो जाना। साधू-संत को समाज से कोई मतलब नहीं होता वे पारिवारिक जीवन नहीं जीते, लेकिन प्रज्ञा के साथ ये सब चीजें लगी हुई हैं। इसलिए वे साध्वी नहीं हैं। प्रज्ञा को अपनी बात कहते समय भाषा पर संयम रखना चाहिए।

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