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आगरा | ताजमहल पर जारी विवाद के बीच यहाँ स्थति मस्जिद के इमाम ने कहा है की ताजमहल में शिव चालीसा नही हो सकती क्योकि यह एक कब्रिस्तान है. मालूम हो की शुक्रवार को आरएसएस की अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति की और से मांग की गयी थी ताजमहल में शिव चालीसा का पाठ करने की अनुमति दी जानी चहिये. इसके अलावा आरएसएस की और से ताज में शुक्रवार की नमाज पर भी रोक लगाने की मांग की गयी.

टीवी न्यूज़ चैनल आज तक से बात करते हुए ताजमहल मस्जिद के इमाम सादिक अली ने कहा की ताज पर छिड़ा विवाद सही नही है और इसे बातचीत के जरिये सुलझाना चाहिए. आरएसएस के इतिहास विंग की मांग का जवाब देते हुए उन्होंने कहा की ताजमहल में कब्र होने की वजह से यह कब्रिस्तान की श्रेणी में आता है. इसके अलावा यहाँ एक मस्जिद भी है. इसलिए ताजमहल में शिव चालीसा का पाठ नही हो सकता.

उल्लेखनीय है की ताजमहल को लेकर पिछले एक महीने से विवाद छिड़ा हुआ है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब योगी सरकार ने ताजमहल को प्रदेश की पर्यटन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया. इसके बाद कई बीजेपी नेताओ ने ताजमहल को लेकर बयानबाजी की. बीजेपी विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय संस्कृति पर धब्बा करार दिया तो बीजेपी सांसद विनय कटियार ने ताजमहल को शिव मंदिर घोषित कर दिया.

इसके बाद हिन्दू युवा वाहिनी के कुछ सदस्यों ने ताजमहल को शिव मंदिर बताते हुए वहां शिव चालीसा का पाठ भी किया. इसके बाद ही आरएसएस की इतिहास विंग के सचिव डॉक्टर बालमुकुंद पांडे ने मीडिया से बात करते हुए कहा की ताजमहल में हर शुक्रवार होने वाली नमाज पर रोक लगनी चाहिए. क्योकि ताजमहल एक राष्ट्रिय धरोहर है इसलिए इसका धार्मिक इस्तेमाल बंद होना चाहिए. अगर ऐसा नही होता तो वहां पर शिव चालीसा का पाठ करने की भी अनुमित मिलनी चाहिए.

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