महात्मा गांधी के खिलाफ नजरिया क्यों फैला रहा है संघ?

‘भारत माता की जय’ कहने को लेकर छिड़े सियासी विवाद में बीजेपी सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों का विरोध कर रही है और आरएसएस का नजरिया जनता पर थोपना चाहती है। गांधी जी जय हिंद कहने पर लोगो को बाध्य करने के खिलाफ थे और उसे देश को बांटने वाला काम मानते थे लेकिन बीजेपी सरकार ने भारत माता की जय को देशभक्ति का पहचान करार दे दिया है और आरएसएस ने इससे आगे बढ़कर जय हिंद कहने वाले लेकिन ‘भारत माता की जय’ न कहने वालों को भी देशद्रोही की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

एआईएमआईएम नेता असदद्दीन ओवैसी का एक तरह से बचाव करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी ने कहा कि राष्ट्रपिता किसी से जबरिया देशभक्ति का नारा लगवाने के खिलाफ थे। बापू को यह कत्तई मंजूर नहीं था कि किसी को जय हिंद कहने के लिए बाध्य किया जाए।

गुजरात विद्यापीठ के एक कार्यक्रम को संबोधित करने अहमदाबाद पहुंचे राजमोहन गांधी ओवैसी विवाद पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उनका कहना था, ‘स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी आजादी के दीवाने सड़कों पर उतर आते थे और दूसरों को जय हिंद कहने के लिए बाध्य करते थे। ऐसा नहीं कहने वालों को पीटने की धमकी देते थे। यह बात बापू को नापसंद थी।’

राजमोहन के अनुसार, ‘गांधी जी ने कहा था कि जय हिंद कहने के लिए एक आदमी को भी बाध्य किया तो यह स्वराज के ताबूत में कील ठोकने जैसा होगा।’ उन्होंने कहा, ‘आज भी हमें नारा लगाने के लिए बाध्य किया जा रहा है। ये लोग कहते हैं कि नारा नहीं लगाओगे तो पिटाई करेंगे।”

ध्यान देने वाली बात यह है जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी देशभक्ति के नारे के लिए बाध्य करने को देश को बांटने जैसा करार दिया था तो क्या भारत माता की जय नारे के लिए जनता को बाध्य करके बीजेपी और आरएसएस देश को बांटना चाहते हैं? गौरतलब है कि ओवैसी ने कहा था कि गले पर छुरी भी रख दोगे तो भी भारत माता की जय नहीं बोलूंगा हालांकि उन्होने जय हिंद कहा था लेकिन इन मुद्दे को लेकर बीजेपी नेताओं ने राजनीति शुरू कर दी और उन्हें देशद्रोही करार देकर देश छौड़ने की बात भी कह डाली। (hindkhabar)

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