भारत सरकार ने देश से रहे रहे 40000 रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी बीच रोहिंग्या मुस्लिमों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह उन्हें म्यांमार भेजने के बजाय मार दे.

उन्होंने कहा कि म्यांमार लौटने से बेहतर वे यहां मरना पसंद करेंगे, क्योंकि म्यांमार पहुंचने के बाद हमे जेल में डाल दिया जाएगा. हालांकि कुछ का कहना है कि वे लौटने के लिए तैयार है लेकिन वहां इस लायक माहौल तो हो.

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बीबीसी से बात करते हुए 32 साल के इमाम हुसैन कहते है, ‘मैं घर वापस जाने के लिए तैयार हूं अगर वहां पर कानून और व्यवस्था हमारे वापस लौटने के अनुकूल हो.’ उनका कहना है कि हम अपने देश में सरकार द्वारा मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचार की खबरें सुनते रहते हैं. वह कहते हैं, ‘मुझे पता चला है कि अब कोई घर लौटता है तो उसके रिश्तेदारों को जेल में डालकर प्रताड़ित किया जाता है.’ हुसैन ने कहा, ‘यहां मैं आज़ाद हूं.

वहीँ एक अन्य युवक सद्दाम हुसैन ने बताया, ‘अगर सरकार हमें वापस घर भेजती है तो हम उससे मुकाबला नहीं कर सकते.’ उन्होंने कहा कि बर्मा में सुरक्षा ही हमारी सबसे बड़ी चिंता है. ‘मेरे माता-पिता बर्मा में ही हैं और मुझे जानकारी मिलती रहती है कि वहां मुस्लिमों को मारा जा रहा है.’

दरअसल गृह मंत्रालय विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 3(2) के तहत अवैध विदेशी नागरिकों का पता लगाने और उन्हें वापस भेजने के लिए मिले अधिकार के आधार पर उन्हें भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है. राज्य सरकारों और वहां के प्रशासन को भी रोहिंग्या सहित अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने उन्हें रोकने और उन्हें वह वापस भेजने की शक्तियां दी गई हैं.

भारत में ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान इस वक्त जम्मू कश्मीर, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रहते हैं. गृह मंत्रालय के आकड़ों के अनुसार भारत में कुल 16,000 रोहिंग्या मुसलमान पंजीकृत हैं, जबकि इनकी संख्या 40,000 हो सकती है.

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