म्यांमार से सुरक्षा बलों और बौद्ध आतंकियों से अपनी जान बचा कर भारत में शरणार्थी बनकर रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों का यहाँ से भी आसरा छीन सकता हैं. केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने जम्मू और कश्मीर में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की जांच की मांग की हैं.

पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर में म्यांमार हैं, कैसे इतनी दूर आए, कौन सी संस्थाएं हैं जो वहां सेटल करा रही हैं? म्यांमार से आकर जम्मू में रहने लगे रोहिंग्या मुसलमानों को किसने बसाया, इस पर भारी सियासत है. ऐसे में जम्मू..कश्मीर में इन शरणार्थियों की पृष्ठभूमि की जांच की आवश्यकता है.

केंद्रीय मंत्री ने जम्मू में म्यामांर के प्रवासियों के रहने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उनके यहां रहने के कारणों की जांच करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि इन विदेशियों के यहां रहने का सर्मथन कर वे राज्य में जनसांख्यिकी बदलाव चाहते हैं.

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वहीँ उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय एक बड़ा मुद्दा बन गया है. भारत में एक अनुमान के मुताबिक 36 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत के अलग अलग हिस्सों में शरण लिए हुए हैं.

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