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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के बाद सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर शुक्रवार को रिटायर हो गए। रिटायमेंट के बाद उन्होने कहा, उन्‍हें अपने 42 साल के करियर में कोई पछतावा नहीं है।

इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के साथ मिलकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कामकाज पर सवाल उठाने वाले चेलमेश्वर ने कहा, न्यायपालिका के साथ कुछ समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन वे सिस्‍टम से लड़े हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ की गई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस पर उन्होने कहा, 12 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो हुआ वो वास्तव में अभूतपूर्व था। अभूतपूर्व घटनाओं के अभूतपूर्व परिणाम होते हैं। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों पर बागी का ठप्पा लग गया। पर मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है। बता दें कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे। इस दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बीएच लोया की रहस्यमय मौत के मामले सहित अन्य मामलों के आवंटन पर सवाल उठाए थे।

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जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में कई चीजें सही नहीं थीं। सही-गलत की समझ के आधार पर चीजें सही करनी चाहीं। कुछ नहीं बदला तो देश को बता दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हमें चार लोगों का गैंग कहा जाने लगा। सुप्रीम कोर्ट में तो पहले भी अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं, पर उनकी आलोचना नहीं हुई। क्या कभी दोपहर बाद 3.30 बजे सात जजों की संविधान पीठ बनी है? उसमें भी ऐन मौके पर दो कुर्सियां हटाकर सिर्फ पांच जज बैठाए। सवाल उठाने वाले क्यों नहीं पूछते कि वहां क्या हुआ? प्रेस कॉन्फ्रेंस का जो असर होना चाहिए था, वह पूरी तरह नहीं हुआ। पर लोग जागरूक हुए हैं।”

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “चीफ जस्टिस को रिटायरमेंट से पहले उत्तराधिकारी की सिफारिश करने का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन वह जो भी फैसला लें, उसका कारण होना चाहिए। परंपरा है कि वरिष्ठतम जज का नाम चीफ जस्टिस के लिए भेजा जाता है। अगर किसी वजह से चीफ जस्टिस यह परंपरा तोड़ते हैं तो उनके पास इसका कारण होना चाहिए। जजों को रिटायरमेंट के बाद पदों के लालच से बचाने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए। यह जनता के हाथों में है। मैं सिर्फ अपने बारे में कह सकता हूं कि मैंने रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लेने का फैसला किया है।”

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