Wednesday, June 23, 2021

 

 

 

अर्नब केस में विधायिका और न्यायपालिका आमने-सामने, दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित

- Advertisement -
- Advertisement -

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के मामले में विधायिका और न्यायपालिका में टकराव होता दिख रहा है। दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों में अर्नब गोस्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन प्रस्ताव पारित किया गया। जिसमें कहा गया है कि अर्नब मामले में सदन हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी नोटिस का न तो संज्ञान लेगा और न ही इसका जवाब देगा।

शीत सत्र के आखिरी दिन (मंगलवार) को पारित हुए प्रस्तावों के अनुसार कोर्ट के किसी नोटिस का जवाब देने का मतलब होगा कि न्यायपालिका आगे विधायिका की निगरानी कर सकती है। इसे संविधान के आधारभूत ढांचे के खिलाफ करार दिया गया है। विधानसभा स्पीकर नाना पटोले ने इसके एकमत से पारित होने की घोषणा की। उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किसी नोटिस और समन का स्पीकर और डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल कोई जवाब नहीं देंगे।

वहीं विधान परिषद में अध्यक्ष रामराजे नाइक निंबलकर ने भी प्रस्ताव एकमत से पारित होने का ऐलान किया। इसमें भी कहा गया है कि अगर अर्नब गोस्वामी विशेषाधिकार उल्लंघन की कार्यवाही को न्यायपालिका में चुनौती देते हैं, तो सदन हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए किसी नोटिस और समन का जवाब नहीं देगा।

स्पीकर नाना पटोले के अनुसार संविधान ने सरकार के तीनों अंग न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के लिए कुछ सीमाएं निर्धारित की हैं। हर अंग को इन सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। किसी को भी एक-दूसरे की सीमाओं में हस्तक्षेप की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

उन्होने कहा, सार्वजनिक तौर पर विधायिका, सचिवालय और उसके सचिव और अन्य अफसर अगर कोर्ट नोटिस का जवाब देते हैं, तो इसका मतलब होगा कि वे न्यायपालिका को विधायिका पर निगरानी रखने का अधिकार दे रहे हैं और यह संविधान के आधारभूत ढांचे का ही उल्लंघन है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles