टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) के घोटाले में मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने मंगलवार को आरोप-पत्र दाखिल कर दिया। इस मामले में रिपब्लिक टीवी (Republic TV) के वितरण प्रमुख समेत 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

क्राइम ब्रांच इस केस में रिपब्लिक टीवी के पश्चिमी क्षेत्र के डिस्ट्रीब्यूशन प्रमुख तथा दो चैनलों के मालिकों समेत अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जिसमे फिलहाल सात आरोपी जमानत पर बाहर है। 1,400 पन्नों की चार्जशीट में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और न्यूज नेशन सहित छह चैनलों पर दो साल से पैसे देकर टीआरपी बढ़ाने का आरोप है।

इस घोटाले का पर्दाफाश रेटिंग एजेंसी ब्राडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) द्वारा हंसा रिसर्च ग्रुप के जरिये की गई शिकायत के बाद पिछले महीने हुआ था। जिसमे कहा गया था कि कुछ टेलीविजन चैनल टीआरपी के आंकड़ों में हेरफेर कर रहे हैं। ‘व्यूअरशिप डेटा’ दर्ज करने के लिए मापक यंत्र लगाने की जिम्मेदारी ‘हंसा’ को दी गई थी।

इस डेटा से यह पता चलता है कि कौन सा चैनल कितनी देर देखा गया और इसी आधार पर टीवी चैनलों का विज्ञापन राजस्व निर्भर करता है। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कुछ चैनल टीआरपी बढ़वाने के लिए रिश्वत दे रहे हैं ताकि उनकी विज्ञापन से होने वाली कमाई बढ़ सके।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Param Bir Singh) ने पिछले महीने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी और दो मराठी चैनल बॉक्स सिनेमा तथा फक्त मराठी टीआरपी के साथ छेड़छाड़ में शामिल थे।  हालांकि, रिपब्लिक टीवी और अन्य आरोपियों ने किसी भी गलत कृत्य और टीआरपी प्रणाली में छेड़छाड़ की बात से इनकार किया है।

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