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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से ‘मुस्लिम’ शब्द को हटाने के सुझाव को विश्वविद्यालय ने खारिज करते हुए इसे बेतुका करार दिया। एएमयू ने कहा कि संस्‍थान के लंबे इतिहास और इसके विशेष स्‍थान को नजरअंदाज किया जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में एएमयू ने पैनल के इस सुझाव को निरर्थक बताया है और कहा है कि पैनल ने यूनिवर्सिटी के लंबे इतिहास और विशिष्ट चरित्र को अनदेखा किया है। एएमयू के रजिस्ट्रार जावेद अख़्तर ने सरकार को लिखा है कि ‘यूनिवर्सिटी का नाम हमें हमारे इतिहास, उद्देश्य और चरित्र की याद दिलाता है और इसे बचाकर रखना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।’

अख्तर ने आगे कहा, ‘पैनल को लगता है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से मुस्लिम हटाने से इसमें सेक्युलरिज्म आ जाएगा, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि भारत का धर्म निरपेक्षता का कॉन्सेप्ट न्याय और समानता के सिद्धांतों से लिया गया न कि पश्चिम में प्रचलित मज़हब मुख़ालिफी से।’

उन्होंने यह भी है कि समिति ने गलत तरीके से निष्कर्ष निकाला है कि एएमयू का नाम बदलने से अलीगढ़ विश्वविद्यालय धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का जन्म होगा। बता दें कि पिछले साल सलाह दी गई थी कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्‍दू विश्वविद्यालय के नाम से ‘मुस्लिम’ और ‘हिन्‍दू’ शब्‍द हटा लिया जाए, ताकि विश्‍वविद्यालयों का सेक्‍युलर चरित्र प्रदर्शित हो सके।

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