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उर्दू शायरी की अजीम शख्सियत असदउल्लाह बेग ख़ां उर्फ ‘ग़ालिब’ का आज जन्मदिन है. उनके जन्मदिवस पर गूगल ने ग़ालिब का ख़ास डूडल बनाकर याद किया.

27 दिसंबर 1796 में उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में जन्मे ग़ालिब को दुनिया भर के मशहूर शायरों में गिना जाता है. भारत और पाकिस्तान में उनके चाहने वालो में कोई कमी नहीं है. उनके चाहने वालों से उन्हें दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला का खिताब मिला है.

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ग़ालिब मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि थे. 1850 में बहादुर शाह जफर द्वितीय ने ही उन्हें  दबीर-उल-मुल्क की उपाधि दी थी. मुग़ल सल्तनत के पतन के बाद वे काफी निर्धन हो गए थे. ब्रिटिश ने उनकी पेंशन रोक दी थी.

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गरीबी के चलते ग़ालिब को दिल्ली आना पड़ गया. दिल्ली में उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा. गालिब के पास खाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे. उन्होंने मनोरंजन के लिए लोगों को ‘असद’ नाम से शायरी सुनाना शुरू कर दिया.

15 फरवरी 1869 को गालिब ने आखिरी सांस ली. उन्हें दिल्ली के निजामुद्दीन बस्ती में दफनाया गया। उनकी कब्रगाह को मजार-ए-गालिब के नाम से जाना जाता है.

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