Thursday, September 16, 2021

 

 

 

अयोध्या फैसले पर पुनर्विचार याचिका से कोई फायदा नहीं, जमीयत नही करेगी समर्थन: महमूद मदनी

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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को लेकर जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी ने अयोध्या प्रकरण में जो लोग पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहे हैं, उसका कोई फायदा नहीं होना हैं, लेकिन जमीयत पुनर्विचार याचिका का न तो विरोध करेगी और न ही समर्थन करेगी।

बयान में कहा गया है, ‘‘जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द (महमूद मदनी गुट) की कार्यकारिणी समझती है कि पुनर्विचार याचिका दायर करना लाभदायक नहीं है, लेकिन विभिन्न संस्थाओं ने अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर करने की राय कायम की है, इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाएगा।’’

बयान के अनुसार, मस्जिद दूसरी जगह नहीं बनाई जा सकती है। इसलिए बाबरी मस्जिद के बदले में अयोध्या में पांच एकड़ ज़मीन कबूल नहीं करनी चाहिये। इसके अलावा, बयान में संगठन ने पुरातत्व विभाग के तहत आने वाली मस्जिदों में नमाज पढ़ने की इजाजत देने की भी मांग की।

babri masjid

बयान में कहा गया है कि केंद्र तथा राज्य सरकारों के हस्तक्षेप नहीं करने के कारण वक्फ संपत्तियों के केयर-टेकर ऐसे निर्णय लेते हैं जो समुदाय के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। इसमें कहा गया है, ‘‘बाबरी मस्जिद से संबंधित मामले में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने मुसलमानों के साथ विश्वासघात किया है।’’

बता दें कि पिछले रविवार को लखनऊ में बोर्ड की कार्यकारिणी ने बैठक कर निर्णय लिया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। बोर्ड ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि अन्यत्र लेने से भी यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि यह शरीयत के खिलाफ है।

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