लखनऊ, 13 दिसम्‍बर (भाषा) मुसलमानों के प्रमुख सामाजिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिन्‍द के अध्‍यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि जमीयत या मुसलमानों का भाजपा से सिर्फ भेदभाव और फिरकापरस्‍ती को लेकर विरोध है। अगर भाजपा और राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ साम्‍प्रदायिकता और नफरत की सियासत छोड़ दें तो हम उसका साथ देने को तैयार हैं।

मौलाना मदनी ने कल रात यहां आयोजित ‘राष्‍ट्रीय एकता सम्‍मेलन’ में कहा कि जमीयत या मुसलमानों का भाजपा से कोई व्‍यक्तिगत विरोध नहीं है। भाजपा अगर अमन-ओ-इंसाफ और प्‍यार मुहब्‍बत को बढ़ावा दे और अपनी नफरत की सियासत छोड़ दे और नफरत फैलाने वालों को सजा दे तो जनता उसके साथ होगी।

उन्‍होंने कहा, ‘‘ जमीयत को सत्‍ता की कोई ख्‍वाहिश नहीं है। वह सिर्फ भेदभाव और फिरकापरस्‍ती को लेकर भाजपा का विरोध करती है। भाजपा और संघ अगर भेदभाव और साम्‍प्रदायिकता की सियासत को आग लगा दें तथा प्‍यार और मुहब्‍बत को अपनाये तो हम उनका साथ देने के लिये तैयार हैं।’’ हालांकि मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि कुछ मुट्ठी भर लोग नफरत फैलाकर हिन्‍दुस्‍तान को आग लगाना चाहते हैं। अगर भाजपा उन्‍हें वाकई छूट दे रही है तो ज्‍यादातर अमनपसंद भारतवासी उसे 2019 के लोकसभा चुनाव में सबक सिखाएंगे।

उन्‍होंने कहा, ‘‘ चंद मुट्ठी भर लोग जहां चाहें किसी को कहीं भी पकड़कर कत्‍ल कर रहे हैं और कोई पूछने वाला नहीं है। ये कत्‍ल वहीं हो रहे हैं, जहां-जहां भाजपा की हुकूमत है। वे दीवाने यह समझते हैं कि हुकूमत हमारी है। हम जो चाहे कर सकते हैं। अगर वाकई इन लोगों को छूट दी जा रही है तो भाजपा को साल डेढ़ साल के बाद इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।’’ उन्‍होंने कहा कि मुल्‍क की खराब सूरतेहाल से निपटना हर हिन्‍दुस्‍तानी का फर्ज है। अगर मुल्‍क में खुदा ना खास्‍ता बरबादी आयी तो वह हिन्‍दू या मुसलमान को नहीं देखेगी। उसका नतीजा सबको भुगतना होगा। मुट्ठी भर लोग मुल्‍क में तबाही मचाये हुए हैं। सबसे पहले अखलाक का कत्‍ल हुआ, लेकिन जिन लोगों ने उस कत्‍ल के खिलाफ अपने अवार्ड वापस किये उनमें 99 प्रतिशत गैर-मुस्लिम थे। इसका मतलब है कि मुल्‍क के ज्‍यादातर लोग शांति चाहते हैं।

मदनी ने कहा कि आज आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवान 20-20 साल से जेलों में बंद हैं। आज तक जुर्म साबित नहीं हुआ। दरअसल इसके पीछे मकसद यह साबित करना है कि इस्‍लाम अमन का धर्म नहीं बल्कि आतंकवाद का मजहब है। इस्‍लाम का इतिहास 1400 साल का है तो हिन्‍दुस्‍तान में इसका इतिहास 1300 साल का है। अगर यह मजहब आग लगाने वाला होता तो 1300 साल में तो हिन्‍दुस्‍तान का वजूद खत्‍म हो गया था।

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