21वी शताब्दी के भारत में ज्यादातर लोगो का सपना है की उनको पढने लिखने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल जाये. इसका सबसे बड़ा कारण यह है की खेती बाड़ी के लिए जमीने सिकुड़ती जा रही है और अपना व्यवसाय करने के लिए बहुत पैसो की जरुरत पड़ती है. इसलिए लोग नौकरी करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते है. लेकिन हमारे देश में नौकरी पाना इतना भी आसान नही है. करोडो बेरोजगार लोग लम्बी लाइन लगाए हुए खड़े है. न निजी क्षेत्र और न ही सरकार इन बेरोजगारों को नौकरी दे पाने में सक्षम नजर नही आ रही है.

यही कारण है की 2014 के लोकसभा चुनावो में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और वादा किया की उनकी सरकार बनने के बाद हर साल 1 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी दी जाएगी. अब मोदी सरकार बने तीन साल हो चुके है. ऐसे में नौकरी न मिल पाने की वजह से लोगों का मोदी सरकार से भरोसा उठ रहा है. इस बात का खुलासा रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या का ताजा सर्वे में हुआ है.

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बेंगलुरु, चेन्‍नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दि‍ल्‍ली में कराये गए आरबीआई के सर्वे में तीन सालों में सरकार के दावे के बावजूद लोगों की आय में किसी प्रकार की कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. लोगों की सैलरी जितनी 2013 में थी, अब भी वहीँ है. हालांकि खर्चों में बढोतरी जरुरु हुई है.

सर्वे के अनुसार मार्च 2016 में 31.3 % लोगों का मानना था कि‍ उनकी इनकम बढ़ी है वहीं मार्च 2017 में 27.7 % लोगों की ये राय रही. वहीँ मार्च 2016 में 54.6 परसेंट लोगों का भरोसा था कि‍ उनकी आय बढ़ेगी मगर जून 2017 तक 54.6 परसेंट घटकर 48.6 % लोगों का ये भरोसा रह गया.

वहीँ रोजगार के मामले में मार्च 2016 में 34.3 % लोगों ने  लगता था कि हालत सुधरे है लेकिन  जून 2017 में सिर्फ जून 2017 में 30.8 % लोगों ने इस पर सहमति जताई. इसी के साथ 21.2 % लोगों ने रोजगार के खतरे को लेकर स्थिति बिगड़ने का संदेह जताया है.

इसके अलावा इकोनॉमि‍क सि‍चुएशन को लेकर भी लोगों का सरकार से भरोसा उठा है. मार्च 2016 में 39.9 % लोगों हालात सुधरने की बात कही थी.  वहीं जून 2017 के बीच ऐसा मानने वालों की संख्‍या में करीब 7 % की गि‍रावट हुई है. साथ ही महंगाई पर चिंता

जताने वालों कीभी संख्या में बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2016 में 77.3 % लोगों ने माना कि‍ कीमतें बढ़ी हैं वहीं मार्च 2017 में ये आकड़ा बढ़कर 85.8 % तक पहुँच गया है.

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