नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद पुरे देश में कैश की भारी किल्लत हो गयी. न बैंक और न ही एटीएम, किसी के पास भी पर्याप्त मात्र में नए नोट नही थे. नोट बंदी के तीन महीने बाद भी हालात सामान्य नही हुए है. पिछले तीन महीने से जनता अपने ही पैसे के लिए बैंक दर बैंक भटक रही है. नोट बंदी से लोगो को हुई परेशानी का मुल्यांकन करने के लिए बनी संसदीय समिति ने आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल से कई तीखे सवाल किये.

इसके अलावा रिज़र्व बैंक ने नोट बंदी के बाद के सभी आंकड़े संसदीय समिति के सामने रखे है. ब्लूमबर्ग ने आरबीआई की रिपोर्ट के आधार पर एक बेहद ही चौकाने वाला खुलासा किया है. रिपोर्ट के अनुसार रिज़र्व बैंक ने 13 जनवरी तक कुल 9.1 ट्रिलियन रूपए मूल्य के नए नोट जारी किये है. लेकिन चौकाने वाली बात यह है की लोगो ने बैंक और एटीएम से करीब 600 अरब रूपए अतिरिक्त निकाले है.

ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया की आरबीआई ने बुधवार को संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया की 177 ख़राब रूपए में से 154 ख़राब रूपए चलन से बाहर कर दिए गए. नोट बंदी के बाद आरबीआई ने 9 नवम्बर से 13 नवम्बर के बीच 55.3 ख़राब रूपए के नए नोट छापे और 25 अरब 19 करोड़ 70 लाख रूपए बैंकों में सर्कुलेशन के लिए डाले गए.

रिपोर्ट में बताया गया की 13 जनवरी तक आरबीआई द्वारा जारी किये गए नए नोटों से करीब 600 अरब रूपए लोगो ने बैंकों और एटीएम से निकाले गए. विशेषज्ञों के अनुसार जारी किये गए नोटों के मुकाबले लोगो के पास कम करेंसी होनी चाहिए. ऐसे में सवाल उठता है की इतने अधिक नोट लोगो के पास कैसे पहुंचे? बैंकों के पास अतिरिक्त 600 अरब रूपए कहाँ से आये? हालाँकि अभी तक इन आंकड़ो की अधिकारिक पुष्टि नही हुई है.


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