बीते कई दिनों से मोदी सरकार के साथ चल रही तनातनी के बाद आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे उन्होंने निजी कारणों को जिम्मेदार बताया है।

बता दें कि भारत सरकार ने अगस्त 2016 में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल को नया गवर्नर घोषित किया था। उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी। उनका कार्यकाल 3 साल का था। हालांकि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता सहित कुछ मुद्दों को लेकर सरकार के साथ मतभेद की खबरों के बाद यह अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि वह पद छोड़ सकते हैं।

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उर्जित पटेल ने इस्तीफे में कहा है, ‘व्यक्तिगत कारणों की वजह से मैंने मौजूदा पद तत्काल प्रभाव से छोड़ने का फैसला किया है। वर्षों तक रिजर्व बैंक में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ मुझे रिजर्व बैंक में सेवा का मौका मिला, यह मेरे लिए सम्मान की बात है।’ गौरतलब है कि उर्जित पटेल का कार्यकाल सितंबर 2019 में खत्म होने वाला था।

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उन्होंने आगे लिखा, ‘आरबीआई स्टाफ, ऑफिसर्स और मैनेजमेंट के समर्थन और कड़ी मेहनत से बैंक ने हाल के वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। मैं इस मौके पर अपने साथियों और आरबीआई के डायरेक्टर्स के प्रति कृतज्ञता जाहिर करता हूं और उन्हें भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।’ रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर केंद्र सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर पिछले कई दिनों से बहस चल रही थी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नीति आयोग के सीईओ राजीव कुमार ने कुछ ही देर पहले पीएम से मुलाकात की हैं। माना जा रहा है कि उन्हें अतिरिक्त जिम्मदेरी मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उर्जित पटेल के इस्तीफे से शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है, क्योंकि बाज़ार जानना चाहता है कि सरकार और आरबीआई के बीच में क्या अनबन थी।

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