भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने  बैड लोन के डिफॉल्टरों के नामों का कर दिया है। जिसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 20 फीसदी बैड लोन टॉप 20 डिफॉल्टर्स के पास है। इनके ऊपर कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये का लोन है।31 मार्च, 2018 तक भारतीय बैंकिंग प्रणाली में कुल बैड लोन 10.2 लाख करोड़ रुपये था।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के टॉप 20 डिफॉल्टर्स के पास 2.36 लाख करोड़ गैर-निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) हैं, जो वित्त वर्ष 2018 के अंत तक शीर्ष 20 उधारकर्ताओं को 4.69 लाख करोड़ रुपये के कुल लोन एक्सपोजर का लगभग 50% है। हालांकि, निजी बैंकों के मामले में टॉप 20 डिफॉल्टर्स द्वारा डिफॉल्ट, लोन एक्सपोजर का 34% है।

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रिजर्व बैंक के आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि वित्त वर्ष 2016 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने टॉप 20 उधारकर्ताओं का लोन 18% तक बढ़ा दिया था, लेकिन वित्त वर्ष 2017 में इसे 10% तक घटा दिया गया, इसके बाद वित्त वर्ष 2018 में 3% की वृद्धि हुई, लेकिन निजी बैंकों ने वित्त वर्ष 2016 में लोन एक्सपोजर में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की, वित्त वर्ष 2016 में 13% और वित्त वर्ष 2018 में 21% की वृद्धि हुई।

एनपीए बैंक की बैलेंस शीट्स और उनके कारोबार को हिट करता है, क्योंकि इन बैंकों के पास बैड लोन के खिलाफ पर्याप्त पूंजीगत प्रावधान नहीं है। चीन और ब्राजील जैसे विकासशील देशों की तुलना में, भारत का शुद्ध एनपीए और पूंजीगत प्रावधान का अनुपात बहुत खराब है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन साल में भारी बैड लोन के कारण, पीएसयू बैंक टॉप 20 उधारकर्ताओं के लोन जोखिम के संबंध में सतर्क हो गए हैं।

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