नई दिल्ली | नोट बंदी हुए दो महीने से ज्यादा हो चूका है लेकिन अभी भी नकदी निकासी की सीमा को नही हटाया गया है. हिंदुस्तान दुनिया का पहला देश है जहाँ अपने ही खाते से पैसे निकालने पर सीमा तय की गयी है. नोट बंदी के बाद से ही विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है की इसको लागु करने के लिए सरकार ने पर्याप्त तैयारिया नही की. हालाँकि सरकार हर बार कहती रही की नोट बंदी को लागु करने के लिए भरपूर इंतजाम किये गए थे.

हालाँकि जमीनी हकीकत सरकार के दावों से बिलकुल विपरीत है. लेकिन न तो आरबीआई और न ही सरकार यह बता रही है की नोट बंदी को लागु करने से पहले कितनी तैयारी की गयी और इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगे? आरबीआई ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए यह तक कह दिया की अगर हम इन सवालों के जवाब देंगे को तो हमारी जान को खतरा हो सकता है.

दरअसल ब्लूमबर्ग न्यूज ने आरटीआई लगाकर आरबीआई से कुछ सवाल पूछे थे. करीब 14 सवालो में से आरबीआई ने पांच सवालो के जवाब दिए है. चौकाने वाली बात यह है की आरबीआई ने दो समान सवालों के अलग अलग जवाब दिए गए है. ब्लूमबर्ग ने पुछा था की नोट बंदी को मंजूरी देने वाले बोर्ड में कितने सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया था.

यह सवाल दो बार पुछा गया. एक बार इसका जवाब दिया गया की बोर्ड के सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया. वही दुसरे जवाब में कहा गया की यह जानकारी रिकॉर्ड में ही नही है. एक सवाल में पुछा गया की नोट बंदी के बाद कितने रूपए कमर्शियल बैंकों में जमा किये गए? इसके जवाब में आरबीआई ने कहा की इसकी जानकारी हमारे पास नही है.

नोट बंदी पर चर्चा करने और इस सुझाव को मानने के लिए आरबीआई बोर्ड को किस बात ने प्रेरित किया, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा की यह सवाल आरटीआई एक्ट के दायरे में नही आता. नोट बंदी की तैयारियो और इससे देश पर पड़ने वाले प्रभाव के सवाल के जवाब में आरबीआई ने कहा की यह संवेदनशील जानकारी है , इसको साझा करने से देश की प्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है.


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