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नोटबंदी के ऐलान से ठीक पहले हुई बैठक में RBI बोर्ड ने उस सरकारी दावे को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी से काले धन और नकली करेंसी पर रोक लग जाएगी। हालांकि, रिजर्व बैंक ने नोटबंदी को हरी झंडी दी थी।

नोटबंदी की घोषणा से चार घंटे पहले बुलाई गई आनन-फानन की मीटिंग में RBI बोर्ड ने ये भी साफ कर दिया था कि नोटबंदी के इस फैसले से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बता दें कि आरबीआई की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 561वीं बैठक नोटबंदी के दिन यानी 8 नवंबर, 2016 को शाम 5.30 बजे जल्दबाजी में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।

इस बैठक के मिनट्स ऑफ मीटिंग से केंद्रीय बैंक ने नोटबंदी को सराहनीय कदम बताया था मगर इसके नकारात्मक प्रभाव से भी सरकार को आगाह किया था। इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस मिनट्स ऑफ मीटिंग पर नोटबंदी लागू होने के करीब पांच हफ्ते बाद यानी 15 दिसंबर, 2016 को दस्तखत किए थे।

2000

आरबीआई निदेशकों को वित्त मंत्रालय की तरफ से 7 नवंबर, 2016 को इस बावत प्रस्ताव मिला था, जिस पर बोर्ड डायरेक्टर्स ने सरकारी दावों पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि उच्च मूल्य वाले (1000 और 500) करंसी नोट को प्रचलन से बाहर करने से न तो कालेधन पर रोक लग पाएगी और न ही नकली नोटों की रोकथाम हो सकेगी।

नकली नोटों पर मंत्रालय ने बोर्ड को सूचित किया था कि 1,000 और 500 रुपये में इस तरह के नकली नोटों की कुल मात्रा 400 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। अपने तर्क में आरबीआई बोर्ड ने नोट किया कि जाली नोट की कोई भी घटना देश के लिए चिंता का विषय है लेकिन परिचालन में कुल मुद्रा के प्रतिशत के रूप में 400 करोड़ रुपये बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।

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