Saturday, July 31, 2021

 

 

 

दरगाह ए गरीब नवाज से उठी पैगंबर मुहम्मद ﷺ कानून की मांग

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दिलशाद नूर

अजमेर: रज़ा एकेडमी की तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत मुहिम के अंतर्गत मंगलवार को दरगाह ए ख्वाजा गरीब नवाज (रह.) से पैगंबर मुहम्मद ﷺ कानून की मांग की गई। दरअसल रज़ा एकेडमी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दरगाह शरीफ में हाजिरी दी। जहां खुद्दाम ए दरगाह ए गरीब नवाज ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

इस दौरान सर्किट हाउस में रज़ा एकेडमी प्रमुख अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी साहब, हजरत मौलाना सय्यद मोईनूद्दीन अशरफ अशरफी अल जिलानी साहब और अंजुमन सेकेट्री अब्दुल वाहिद चिश्ती साहब ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत के लिए राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार से पैगंबर मुहम्मद ﷺ कानून को लागू करने की मांग की।

प्रेस को संबोधित करते हुए अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी साहब ने कहा कि देश भर में इस्लाम धर्म और पैगंबर मुहम्मद ﷺ को निशाना बनाया जा रहा है। जिससे मुस्लिम समुदाय में भारी रोष है। उन्होने कहा कि बीते दिनों ख्वाजा ए गरीब नवाज की शान में भी नेशनल मीडिया में गुस्ताखी की गई। जबकि दरबार ए गरीब नवाज से हमेशा ही अमन और शांति का संदेश दिया जाता रहा है। सोशल मीडिया के जरिये भी कई बार दरगाह शरीफ को निशाना बनाया गया है। ऐसे में पैगंबर मुहम्मद ﷺ कानून को लागू किया जाना चाहिए।

वहीं हजरत मौलाना सय्यद मोईनूद्दीन अशरफ अशरफी अल जिलानी साहब ने कहा कि राजस्थान की सरजमीं सांप्रदायिक सोहार्द और भाईचारे की गवाह रही है। इस सरजमीं से हर मजहब के सूफी संतों ने अमन और शांति का संदेश दिया है। लेकिन आज कुछ असामाजिक तत्व इस भाईचारगी को अपनी गंदी राजनीति मंसूबो के चलते तहस-नहस करने पर आमदा है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार को पैगंबर मुहम्मद ﷺ कानून को कर सदियों से चली आ रही राजस्थान की गंगा-जमुनी इस तहजीब को संरक्षित करना चाहिए।

दरगाह शरीफ से अंजुमन सेकेट्री अब्दुल वाहिद चिश्ती साहब ने सईद नूरी साहब और जिलानी साहब के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई भी शख्स किसी भी धर्म के महापुरुषो का अपमान करें। अगर कोई ऐसा करता पाया जाता है तो राज्य सरकार कार्रवाई करने में पीछे न रहे। उन्होने कहा, वसीम रिजवी, स्वामी नरसिंहानंद जैसों ने देश की फिजा में जहर घोल दिया है। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे देश की छवि पूरे विश्व में कलंकित हो रही है। उन्होने तमाम सूफी संतों से आगे आकर राजस्थान की सदियों पुरानी शान से चली आ रही भाईचारगी को बचाने की अपील की।

इस मौके पर साहिबजादा सैयद गुलाम काबरिया चिश्ती, मुफ्ती सैयद नूर-उल-ऐन-उद-दीन, नाजिम-ए-बालेश सैयद इमरान चिश्ती ख्वाजागनी, सैयद हाफिज फाजिल, मौलाना वलीउल्लाह शरीफी साहिब। मौलाना खलील-उर-रहमान नूरी मौलाना अमानुल्लाह नूरी – मौलाना ज़फ़रुद्दीन रिज़वी मुंबई मौलाना इरफ़ान अलीमी मुंबई, हाजी हुसैन आजाद दिल्ली रिजवान अजमेरी – तनवीर अहमद मुफ्ती सैयद नूर-उल-ऐन मोइनी, अजमेर शरीफ, मुफ्ती बशीर-उल-कादरी, अजमेर शरीफ, मौलाना आदम कादरी जोधपुर, मौलाना अरशद आज़मी अजमेर शरीफ, मौलाना उमर फारूक नागूर, मौलाना मुहम्मद अनवर मिस्बाही नागूर, कारी मुहम्मद सिद्दीकी पहलोदी, मुफ्ती कोनिन नूरी कोटा आदि उपस्थित थे।

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