Sunday, June 13, 2021

 

 

 

जेलों में बंद फिलिस्तीनियों की हो रिहाई, नुकसान का मिले मुआवजा: रज़ा एकेडमी

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दिलशाद नूर

मुंबई: रज़ा अकेडमी ने सुन्नी बिलाल मस्जिद में रविवार को हजरत इमाम अहमद रज़ा खाँ उर्फ आला हजरत के 170वें जन्मदिवस को जश्ने यौमे विलादत के रूप में मनाया। साथ ही इस्राइल के खिलाफ पिछले 12 दिनों से जारी जंग में फिलिस्तीनीयों की मिली जीत पर खुशियां मनाई। महफिल का आगाज तिलावत ए कुरान और नाते रसूल से हुआ।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए रज़ा एकेडमी के प्रतिनिधि मौलाना मुहम्मद अब्बास रिजवी ने कहा कि फिलिस्तीन एक मजलूम कौम है। उसकी हर मुमकिन मदद की जाए और आतंकी मुल्क इस्राइल की सख्त आलोचना की जाए। इस्राइल आए दिन विभिन्न बहानों से फिलिस्तीनोयो पर जुल्म करता है। मस्जिद अक्सा को अपने कब्जे में रखना चाहता है। लेकिन दुनिया भर के मुसलमानों को ये मंजूर नहीं। मुसलमान मस्जिद ए अक्सा की बेहूरमती बर्दाश्त नहीं कर सकते। चाहे इसके लिए हमे जान ही क्यों न देनी पड़े।

वहीं रज़ा एकेडमी के संस्थापक अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी ने आला हजरत की शख्सियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि हजरत इमाम अहमद रज़ा खाँ उर्फ आला हजरत फाजिल बरेलवी इस्लाम की एक बड़ी शख्सियत का नाम है। वह सच्चे आशिक ए रसूल रहे। उन्होने दुनिया भर के मुसलमानों को इश्क ए रसूल का दर्स दिया। जिस पर अमल करना मुसलमानो का फर्ज है।

उन्होने फिलस्तीनी मुसलमानो को जीत की मुबारकबाद देते हुए बताया कि रज़ा एकेडमी ने इस्राइली दूतावास के सामने अपना विरोध जताया है। साथ ही फिलिस्तीनीयों के हक में अपनी आवाज न केवल भारत सरकार बल्कि सयुंक्त राष्ट्र, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), अरब मुस्लिम लीग सहित कई अंतराष्ट्रीय संगठनों तक पहुंचाई। ताकि इस्राइल पर दबाव बने और वह इस खूनखराबे को रोके। उन्होने कहा, हम उस वक्त तक खामोश नहीं बैठेंगे कि इस्राइल जेल में बंद बेगुनाह फिलिस्तीनों मुसलमानों को रिहा नही कर देता और जो नुकसान हुआ है उसका मुआवजा अदा नहीं कर देता।

हजरत मोईन उल मशाईख मौलाना सैयद मोईनउद्दीन अशरफ अशरफी अलजिलानी सजादानशीन आस्ताना मखदूम अशरफ ने कहा, इस्राइल अपने नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं हो सकता। इसलिए कि वो जालिम था और ज़ालिम है। हमारी मांग है कि अंतराष्ट्रीय समुदाय इस्राइल को आतंकी मुल्क घोषित करें। साथ ही उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए। सयुंक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन के समर्थन में खड़े होने पर भारत सरकार का भी शुक्रिया अदा करते है।

इस दौरान मुफ़्ती ए आजम यूरोप ने फोन के जरिए अपने संदेश में कहा कि हजरत इमाम अहमद रज़ा खाँ उर्फ आला हजरत के जीवन और उनके कार्यों पर किताबे लिखी जाये। उन्होने इसके लिए इनाम देने की भी घोषणा की। उन्होने कहा कि जो शख्स एक महीने में दस पृष्ठ भी तैयार कर देता है। उसे इस खिदमत के लिए एक हजार रुपए महिना बतौर इनाम दिया जाएगा।

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