Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

मध्यस्थ बनाने को लेकर ओवैसी ने उठाया था सवाल, अब रविशंकर ने दिया जवाब

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नई दिल्ली अयोध्या विवाद का बातचीत से हल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता अपनाया है। हालांकि कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को शामिल किए जाने पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आपत्ति जताई।

ऐसे में अब रवि शंकर ने ओवैसी की ओर से संदेह वाली टिप्पणी को खारिज कर कहा कि लोग जैसा बोलना चाहें, बोलते रहेंगे। अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति में अध्यात्मिक नेता भी हैं।

दरअसल, एआईएमआईएम नेता ने कहा कि ‘यह ज्यादा बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट उनकी जगह किसी तटस्थ व्यक्ति को पैनल में शामिल किया होता।’ समाचार एजेंसी ओवैसी ने कहा, ‘श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थत के रूप में पैनल में शामिल किया गया। वह पहले कह चुके हैं कि मुस्लिम यदि अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ते तो भारत सीरिया बन जाएगा। यह बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट उनकी जगह एक तटस्थ व्यक्ति को पैनल में शामिल करता।’

ओवैसी ने कहा कि उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों को सद्भावना के तहत विवादित भूमि पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रविशंकर को अब इन सब बातों को छोड़कर निष्पक्ष व्यक्ति के तौर पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब वह मामले से जुड़े हुए हैं, जब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किस पक्ष के लिए बोलते हैं… यह दुखद है कि जो व्यक्ति निष्पक्ष नहीं है उसे उच्चतम न्यायालय की तरफ से नियुक्त किया गया है।’ हालांकि, मध्यस्थता के लिए अदालत के आदेश का ओवैसी ने स्वागत किया. उन्होंने कहा, ‘अपनी पार्टी की तरफ से मैं इस निर्णय का स्वागत करता हूं।’

बता दें कि इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएफ कलीफुल्लाह, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं। इस पैनल की अगुवाई जस्टिस कलीफुल्लाह करेंगे। एआईएमआईएम नेता ने कहा कि ‘यह ज्यादा बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट उनकी जगह किसी तटस्थ व्यक्ति को पैनल में शामिल किया होता।’ उन्होंने यह भी कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थ बनाया है तो उन्हें न्यूट्रल रहना होगा।

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