वरिष्ट पत्रकार, रवीश कुमार

नई दिल्ली । राजनीतिक दलो को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए मोदी सरकार ने इलेक्टोरल बॉंड की घोषणा की है। अब कोई भी व्यक्ति इन बॉंड को ख़रीदकर राजनीतिक दलो को चंदा दे सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इन बॉंड को चुनाव सुधार की और एक बड़ा क़दम बताया है। उनका कहना है की यह क्रांतिकारी फ़ैसला है, इससे राजनीतिक दलो को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता आएगी।

लेकिन एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार का मानना कुछ और है। उनका कहना है की ये इलेक्टोरल बॉंड काले धन को सफ़ेद करने का तरीक़ा साबित होंगे। शुक्रवार को एक फ़ेस्बुक पोस्ट के ज़रिए रविश कुमार ने इलेक्टोरल बॉंड पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कोई भी व्यक्ति बिना अपनी पहचान बताए ये बॉंड ख़रीद सकता है और राजनीतिक दलो को चंदा दे सकता है।

रविश कुमार ने ‘काला धन का सबसे बड़ा डॉन-चंदे का धंधा करने वाला इलेक्टोरल बॉंड’ नामक शीर्षक के साथ पोस्ट लिखी है। वे लिखते है,’ सरकार के लिए पारदर्शिता नया पर्दा है। इस पर्दे का रंग तो दिखेगा मगर पीछे का खेल नहीं। चुनावी चंदे के लिए सरकार ने बांड ख़रीदने का नया कानून पेश किया है। यह जानते हुए कि मदहोश जनता कभी ख़्याल ही नहीं करेगी कि कोई पर्दे को पारदर्शिता कैसे बता रहा है।’

रविश आगे लिखते है,’ राजनीतिक दल पहले भी करप्शन का पैसा पार्क करने या जमा करने का अड्डा थे, एक नए कानून के पास होने के बाद अगर आपके पास काला धन है तो चुपचाप किसी दल के खजाने में जमा कर दीजिए। बोझ हल्का हो जाएगा।इसके लिए आपको बस स्टेट बैंक आफ इंडिया की 52 शाखाओं से 1000, 10,000, 1,00000, 1,0000000 का बांड ख़रीदना होगा। आपके ख़रीदते ही आपका काला धन गुप्त हो जाएगा। अब कोई नहीं जान सकेगा। बैंक आपसे नहीं पूछेगा कि आप किस पैसे से बांड ख़रीद रहे हैं और इतना बांड क्यों ख़रीद रहे हैं।’

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