रवीश कुमार, वरिष्ट पत्रकार

नई दिल्ली | कल गुजरात राज्यसभा चुनावो के दौरान जो कुछ भी हुआ उसे देखकर एक बात स्पष्ट तौर पर कही जा सकती है की हमारे देश की राजनीती फ़िलहाल सबसे निचले स्तर को छूने का प्रयास कर रही है. कल की घटना दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए किसी भी लिहाज से सही नही थी. हालाँकि कई पत्रकार इसे प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का मास्टर स्ट्रोक कहने से नही थक रहे थे.

लेकिन एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार देश की इस सबसे बड़ी कवरेज से दूर रहे. उन्होंने इस बात का जिक्र अपनी फेसबुक पोस्ट में भी किया. उन्होंने लिखा की मैने कल अपना विषय नहीं बदला और न ही खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए रात भर एंकरिंग की. रविश ने कल की घटना पर अन्य मीडिया समूह पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा की आपने कल रात कई घंटे तक न्यूज़ चैनलों पर जो देखा वो क्या था? आपका मज़ाक उड़ाने के लिए नेताओं मंत्रियों का रचा तमाशा था.

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रविश ने अपने फेसबुक पेज पर कल की घटना को तमाशा करार देते हुए कहा की यह भारत की सबसे गलीच , शमर्नाक और ओछी स्टोरी थी. इस तमाशे को हाई प्रोफ़ाइल बनाया गया. तमाशे की सघनता ने आपके दिमाग़ में प्राथमिकता पैदा कर दी कि इस वक्त यही देश की सबसे बड़ी स्टोरी है. कोई यह सवाल करने की हिम्मत ही नहीं करेगा कि दूसरे दल से नेताओं को तोड़ने के कितने पैसे लगते हैं? कोई यह सवाल करने की हिम्मत ही नहीं करेगा कि दूसरे दल से नेताओं को तोड़ने के कितने पैसे लगते हैं?

रविश ने राजनितिक लाभ के लिए आयकर विभाग का इस्तेमला करने पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा की क्या आयकर विभाग भारत की राजनीतिक नियति तय करेगा? एक दिन कोई राजनीतिक दल देश भर के आयकर विभाग के दफ्तरों के सामने प्रदर्शन करना शुरू कर देगा. क्या दलबदलू मुफ़्त में आ रहे हैं ? मीडिया इस पर चुप रहेगा. रविश ने कल के घटनाक्रम को मूल समस्याओ की जवाबदेही से बचने का तरीका करार दिया. उन्होंने कहा यही पैटर्न है. आने वाले कल के ईंवेंट में अमित शाह की हार का बदला होगा या कुछ और. यह देखना होगा.

टीवी को असरदार बताते हुए रविश ने कहा की फ़िलहाल टीवी का इतना असर है तो है की सारे सवाल पीछे चले जाते हैं. इसलिए मैंने कल अपना विषय नही बदला. आराम से 10 बजे अपने घर चला गया. मैंने 20 सालो में यही सीखा है की यह सब नौटंकी है. अंत में रविश ने लोगो से न्यूज़ चैनल का बहिष्कार करने की अपील की. केबल नहीं कटवा सकते तो कम से कम न्यूज़ चैनल तो देखना बंद कीजिये . टीवी भयानक प्रभावशाली माध्यम है, मगर आपके लिए नहीं, आयकर विभाग और दारोगा की ताकत से लैस सत्ता के लिए.

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