वरिष्ट पत्रकार, रवीश कुमार

नई दिल्ली । एनडीटीवी के मशहूर ऐंकर और पत्रकार रविश कुमार हमेशा से अपनी तल्ख़ टिप्पणी के लिए प्रसिद्ध रहे है। वह हमेशा से इस बात के समर्थक रहे है की पत्रकारिता सरकार की पिछलगु बनने के लिए नही बल्कि उनसे वाजिब सवाल पूछे जाने के लिए होनी चाहिए। इसलिए वह अपने शो प्राइम टाइम या फिर अपने फ़ेसबुक पेज के ज़रिए सरकारो से सवाल पूछते रहते है।

गुरुवार को अपने फ़ेस्बुक पेज पर उन्होंने दो पोस्ट लिखी। दोनो ही पोस्ट गुजरात चुनाव प्रचार को लेकर थी। इन पोस्ट के ज़रिए उन्होने प्रधानमंत्री मोदी के भाषणो और अंतिम समय में सीप्लेन के ज़रिए प्रचार करने के तौर तरीक़ों पर बेहद तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा, ‘ सावधान, होशियार, ख़बरदार: आज फिर से वे कोई झूठ बोल सकते हैं। भारत को झूठ बोलने के मामले में विश्व झूठ गुरु बनाने निकले हैं। कृपया उन्हें झूठ बोलने से न रोकें।’

रविश आगे लिखते है,’उनके झूठ से देश में शांति रहेगी। आई टी सेल रहेगा। गोदी मीडिया रहेगा। संसद से एक कानून पास कर उनके तमाम झूठ को सत्य घोषित किया जाए। उनका कोई स्तर नहीं है, मान लिया, मान लिया मगर मैं यह कभी नहीं मान सकता कि उनके झूठ का कोई स्तर नहीं है। ऊपर से नीचे तक के क्रम में जितने स्तर हो सकते हैं, उनके झूठ के स्तर हैं। कुछ आपने देख लिया मगर बहुत कुछ देखना बाकी है। आइये हम सब मिलकर उनके झूठ का बचाव करें, गुणगान करें। उनका झूठ ही भारत का गौरव है।’

सीप्लेन पर उन्होंने लिखा,’आइये हम सब पानी में चलने वाले नाव को आसमान में उड़ते हुए देखें। किसी को झूठ बोलते हुए सुनें। वैसे अमरीका से ये जहाज़ क्यों आया, उसके पायलट अमरीकी क्यों लग रहे थे, जबकि सी-प्लेन तो भारत के ही अंडमान निकोबार में रोज़ पांच से छह उड़ानें भरता है। आज से नहीं 2011 से। क्विंट के चंदन नंदी कहते हैं कि इसमें 42 लाख रुपये ख़र्च हो गए।’

अपने भाषणो में पाकिस्तान को लेकर आने पर रविश ने लिखा,’दिल्ली में हुए एक रात्रि भोज को पाकिस्तान से मिलकर साज़िश करने का अड्डा बता दिया जाता है, भारत का मौजूदा प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री पर साज़िश में शामिल होने का आरोप लगाते हैं। मगर उसी के चंद घंटे बाद पानी में उतरने वाला एक जहाज़ बुलाया जाता है जिसके बारे में चंदन नंदन की रिपोर्ट है कि यह जहाज़ अमरीका में रिजस्टर्ड है, कराची से उड़कर भारत आया था। क्या ये भी कोई साज़िश है? बिना तथ्यों के शक करना उन्हीं के जैसा हो जाएगा जो रात्रि भोज को देश के ख़िलाफ़ साज़िश बताते हैं। बेहतर है आप पढ़िए और अपना भी दिमाग़ लगाइये।’

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