अपने कार्यक्रम को लेकर यमुना नदी के तट का नुकसान करने पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर को देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत ने कड़ी फटकार लगाई हैं. अदालत ने कहा कि आप जो भी मन में आये बोल सकते हैं. आप को जिम्मेदारी का अहसास भी हैं की नहीं.

दरअसल, अपने कार्यकर्म से हुए नुकसान को लेकर रविशंकर ने सरकार और अदालत को जिम्मेदार ठहाराया था. उन्होंने कहा था कि यह तो सरकार और अदालत की गलती है कि उन्होंने इस कार्यक्रम की अनुमति दी. याद रहे विशेषज्ञों की टीम ने एनजीटी को बताया कि कई सौ एकड़ में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की वजह से नदी का ताल पूरी तरह बर्बाद हो गया है. और इसकी भरपाई में कम से कम 10 साल लगेंगे और इसमें करीब 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

अदालत की फटाकर पर उन्होने कहा कि ‘अगर किसी तरह का जुर्माना लगाना ही है तो केंद्र, राज्य और एनजीटी पर लगाया जाना चाहिए जिसने इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी. अगर यमुना इतनी ही नाज़ुक और पवित्र है तो उन्हें वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल करने से हमें रोकना चाहिए था.’

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वहीँ इस मामलें को लेकर बीजेपी अब अदालत के खिलाफ आ गई हैं. बीजेपी के नेता महेश गिरी ने ट्वीट कर कहा कि – आर्ट ऑफ लिविंग के बारे में एनजीटी की यह बयान हैरान करने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है. श्री श्री के सानिध्य में आर्ट ऑफ लिविंग ने कई नदियों को पुनिर्जीवित किया है. दुनिया भर में अपने सेवा भाव के लिए पहचाने जाने वाली इस संस्था के खिलाफ कोर्ट का यह बयान पक्षपातपूर्ण है.

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