सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है. जिसमे रेप, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ से संबंधित मामले को जेंडर न्यूट्रल किए जाने की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ता ने मांग करते हुए कहा था कि अगर पुरुष के साथ महिलाओं ने अपराध किया है तो उनके खिलाफ भी मुकदमा चलना चाहिए. याचिकाकर्ता ने कहा था,आईपीसी के कानूनी प्रावधान के मुताबिक रेप और छेड़छाड़ मामले में आरोपी पुरुष हो सकते हैं और महिलाएं पीड़ित, लेकिन ये संविधान के प्रावधान के खिलाफ है.

याचिकाकर्ता वकील ऋषि मल्होत्रा ने आईपीसी की धारा-354 और 375 पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि रेप और छेड़छाड़ में लिंग भेद नहीं हो सकता. इसमें लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता क्योंकि महिलाएं भी ऐसा अपराध कर सकती हैं. ऐसे में आईपीसी की धारा-375 यानी रेप और 354 यानी छेड़छाड़ मामले में किसी के खिलाफ भी केस दर्ज किए जाने का प्रावधान होना चाहिए.

इस दौरान उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-14 और 15 का भी हवाला दिया. जिसमे समानता और लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होने की बात कही गई है. उन्होंने कहा, बावजूद आईपीसी की धारा-375 के तहत सिर्फ पुरुषों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये धाराएं महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए बनाई गई है. अगर पुरुषों के साथ ऐसा होता है तो उसके लिए आईपीसी में अलग प्रावधान है. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून में बदलाव करना संसद का काम है.

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