मंगलवार को लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन हॉल में आयोजित भारतात्मा अशोकजी सिंघल वैदिक पुरस्कार-2018 वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे योगगुरु स्वामी रामदेव ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होने कहा कि क़ुरआन और बाइबल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि कुरान व बाइबल में बहुत सी अच्छी बातें हैं। इन्हें धार्मिक पुस्तक कहा जा सकता है, लेकिन इन्हें धर्मग्रंथ नहीं कह सकते हैं। रामदेव ने कहा कि वेदों को मजहब से ऊपर उठकर देखना चाहिए। उन्होने देश में बाइबल के बजाय वेदों के आधार पर कैलेंडर तैयार किए जाने की भी बात कहीं।

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रामदेव ने ये भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति वेद पर हाथ रखकर शासन करें तो वेद को संविधान में भी सम्मान प्राप्त होगा। हमारे देश में अगर मस्जिद में नमाज पढ़वाने वाले मौलवियों को सरकार वेतन दे सकती है तो वैदिकों को वेतन क्यों नहीं दिया जा सकता है।

हालांकि रामदेव का क़ुरआन और बाइबल के खिलाफ ये पहला बयान नहीं है। इससे पहले उन्होने कहा था कि कुरान में लिखा है कि गोमूत्र इलाज के लिए प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे में मुसलमानों को भी गोमूत्र अपनाना चाहिए, क्योंकि इसका प्रयोग इलाज में किया जा सकता है।

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