उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान जी को दलित बताने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब योग गुरु बाबा रामदेव ने हनुमान जी को ब्राह्मण बताया है।

रामदेव ने कहा, ‘बजरंग बली की जाति को लेकर किसी भी शास्त्र में कोई जिक्र नहीं है। लेकिन गुण, कर्म और स्वभाव के अनुसार वह ब्राह्मण जाति के हैं। क्योंकि वह चारों वेदों के महान विद्वान पंडित हैं। वह महायोगी हैं। भारतीय संस्कृति में जन्म के आधार पर जाति की कोई व्यवस्था नहीं है। कर्म के आधार पर हनुमान जी ब्राह्मण हैं। योगी हैं। योद्धा हैं। क्षत्रिय हैं’।

इससे पहले अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्‍यक्ष नंद कुमार साय ने हनुमान जी को लेकर कहा था कि, ‘जनजातियों में हनुमान एक गोत्र होता है। जैसे कुडुक में तिग्‍गा एक गोत्र होता है। इसका मतलब वानर होता है। हमारे यहां कुछ जातियों में हनुमान और गिद्ध गोत्र भी हैं। हम यह उम्‍मीद करते हैं कि जिस दंडकारण्‍य (जंगल) में भगवान ने बड़े सेना का संधान किया था, उसमें जनजाति वर्ग के लोग शामिल थे। ऐसे में हनुमान जी भी दलित नहीं, जनजाति हैं।’

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वहीं शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि ‘भगवान राम और हनुमान जी के युग में इस देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी, कोई दलित, वंचित, शोषित नहीं था। वाल्मीकी रामायण और रामचरितमानस को आप पढ़ेंगे तो आपको मालूम चलेगा कि उस समय को जाति व्यवस्था  नहीं थी।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘हनुमान जी आर्य थे। इस बात को मैंने स्पष्ट किया है, उस समय आर्य जाति थी और हनुमान जी उसी आर्य जाति के महापुरुष थे।’

गौरतलब है कि अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया था। योगी ने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।

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