jignesh kdgh 621x414@livemint

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मुंबई । गुज़रत के नवनिर्वाचित विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवानी आजकल काफ़ी सुर्ख़ियाँ बटोर रहे है। कहा जा रहा है की उनके भड़काऊ भाषण की वजह से महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़की। इसलिए पुणे पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया है। हालाँकि जिग्नेश का दावा था की वह भीमा कोरेगाँव गया ही नही तो फिर मैंने हिंसा कैसे भड़का दी।

उधर मीडिया में लगातार जिग्नेश के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया जा रहा है। मीडिया ट्रायल के ज़रिए यह साबित करने की कोशिश की जा रही है की 1 जनवरी को महाराष्ट्र में हुई हिंसा के लिए जिग्नेश के भड़काऊ बोल ज़्यादा ज़िम्मेदार है। जिग्नेश के अलावा उमर ख़ालिद के भाषण को ज़्यादातर मीडिया चैनल प्रमुखता के साथ दिखा रहे है। यही नही जिग्नेश की उमर के साथ बढ़ती दोस्ती पर सवाल खडे किए जा रहे है।

सत्तापक्ष और मीडिया के अभियान के बावजूद, मोदी सरकार का ही एक मंत्री जिग्नेश को बेक़सूर मानता है। उन्होंने खुलकर जिग्नेश का समर्थन करते हुए कहा की हिंसा के लिए वह ज़िम्मेदार नही है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मीडिया से बात करते हुए जिग्नेश का बचाव किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस से मुलाक़ात करने के बाद मीडिया से रूबरू हुए अठावले ने कहा,’ शौर्य दिवस मनाने से पहले ही भीमा कोरेगाँव में तनाव था। मैं वहाँ गया था, तनाव कम होने के बाद मैं वापिस दिल्ली चला गया।’

उन्होंने आगे कहा की 31 दिसम्बर को ही जिग्नेश ने पुणे में भाषण दिया था। लेकिन मैं मानता हूँ की नए साल पर हुई हिंसा के लिए वह ज़िम्मेदार नही है। मालूम हो कि हर साल एक जनवरी को दलित शौर्य दिवस मनाते है। लेकिन इस बार इस कार्यक्रम के दौरान हिंसा भड़क गयी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी। दलित नेता इसके लिए कुछ हिंदुवादी संगठनो को ज़िम्मेदार ठहरा रहे है।

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