डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की जेल यात्रा के संबंध में बड़ा खुलासा हुआ है. 15 साल पुराने बलात्कार के मामले में दोनों साध्वियों को न्याय दिलाने और इस जघन्य अपराध की राम रहीम को सज़ा दिलाने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

दरअसल इस मामले की जांच के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीबीआई को खुली छुट दी थी. हालांकि इस दौरान उन पर काफी राजनीतिक दबाव था लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया. मले के मुख्य जांचकर्ता और सीबीआई के रिटायर्ड डीआईजी एम नाराणन ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हमेशा सीबीआई का साथ दिया.

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नारायण ने खुलासा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर इस केस को लेकर राजनीतिक दबाव बनाया गया गया था. हरियाणा-पंजाब के कुछ सांसदों ने मनमोहन सिंह पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. लेकिन उन्होंने पूरी आजादी के साथ हमें कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया.

उन्होंने बताया, जब ज्यादा राजनीतिक दबाव बड़ा तो उन्होंने तत्कालीन सीबीआई चीफ विजय शंकर को बुलाया. लेकिन जब उन्होंने पीड़िता के बयान देखे तो सीबीआई को अपनी जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए. उन्होंने अपने तत्कालीन बॉस विजय शंकर की भी तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, जब ताकतवर सांसदों ने राम रहीम के खिलाफ मामले को खत्म करने को कहा तो विजय शंकर ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया, उन्होंने पूरी तरह से हमारा साथ दिया. नारायणन ने बताया कि यह शिकायत 2002 में दर्ज की गई थी, लेकिन 2007 तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ था.

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