कथित गौरक्षा के नाम पर अलवर में पीट-पीट कर की गई रकबर की हत्या के मामले में अलवर पुलिस ने शुक्रवार को रामगढ़ की सिविल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। जिसमे तीन आरोपियों धर्मेंद्र यादव, परमजीत सिंह व नरेश कुमार को आईपीसी की धारा 302, 341, 323, 34 के तहत आरोपी बनाया गया है।

इसी बीच पीड़ित के पिता सुलेमान और गवाह असलम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT से कराई जाए। याचिका में मामले का ट्रायल और जांच दोनों ही राजस्थान से बाहर की जाए।

याचिका में अलवर के बीजेपी विधायक ज्ञान देव आहूजा को भी पक्षकार बनाया गया है। आरोप लगाया गया है कि विधायक के इशारे पर हत्या के आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है। इस मामले की सुनवाई अगले हफ़्ते सुनवाई करेगा।

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इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन पुलिस वालों का ट्रांसफर करने के साथ एक को निलंबित किया गया है। दोषी अफसरों पर भी कार्रवाई हुई है। सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।

हालांकि सिविल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में किसी भी पुलिसकर्मी को आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं करने पर अलवर पुलिस ने सफाई दी है कि उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। जांच के बाद ही तय होगा कि वे दोषी हैं या नहीं।

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