देश के पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ काँग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के गुरुवार (7 जून) को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पहुँचने का भारत सरकार के स्वामित्व वाले राज्यसभा चैनल ने महिमामंडन करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी।

दरअसल, राज्यसभा चैनल के पत्रकारों ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए पत्रकारिता के सभी नियमों को ताक पर रख दिया। इतना ही नहीं चैनल पर इस कार्यक्रम को करीब 2 घंटा 18 मिनट तक लाइव दिखाया गया, जबकि प्रणब मुखर्जी का भाषण केवल आधे घंटे तक ही चला था।

इस दौरान राज्यसभा टीवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को ‘परम पूज्य’ लिखकर संबोधित किया, जिसको लेकर वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ी आपत्ति जताई है। पत्रकारों का कहना है कि ‘परम पूज्य’ जैसे शब्दों का उपयोग सिर्फ ‘परमात्मा’ के लिए ही किया जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक वेदप्रताप वैदिक ने इसके लिए कमजोर हिंदी और कम ज्ञान को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आगे कहा कि लोगों (पत्रकारों) को भाषा का ज्ञान नहीं होता है, जो उनको ठीक लगता है वह लिख देते हैं। आदर देने के लिए जो शब्दों की बारिकियां होती हैं वह उन्हें पता नहीं है।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार विद्या शंकर तिवारी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में मोहन भागवत के नाम के आगे ‘परम पूज्य’ लगाने को पत्रकारिता के वसूलों के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा, “जहां तक ‘परम पूज्य’ लगाने की बात है तो यह पत्रकारिता के लिहाज से ठीक नहीं है। किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के प्रति लगाव या बहुत सम्मान हो सकता है वह उनके (पत्रकार) निजी रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन यह पत्रकारिता में नहीं झलकना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता में जो मापदंड स्थापित हैं या मर्यादा है यह उसके बिल्कुल विरुद्ध है।

इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने ट्वीट कर लिखा है, ” “परम पूज्य” सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत “जी”?? ये हाल हो गया है राज्यसभा टीवी का। आपके-हमारे पैसे से चलता है, पर चिलम नागपुर की भरता है।”

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