Sunday, September 19, 2021

 

 

 

सामूहिक धर्मांतरण पर बोले राजनाथ सिंह – हिंदू हैं तो हिंदू रहिए और मुस्लिम हैं तो मुस्लिम रहिए

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नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सामूहिक धर्मांतरण पर चिंता जताते हुए कहा कि वह किसी भी धर्म के अनुसरण की आजादी का समर्थन करते हैं, लेकिन सामूहिक धर्मांतरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्‍होंने दो टूक कहा कि कोई व्‍यक्तिगत तौर पर किसी धर्म को स्‍वीकार कर सकता है, लेकिन व्‍यापक पैमाने पर लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन किया जाना चर्चा और जांच का मुद्दा है।

राष्ट्रीय ईसाई महासंघ द्वारा आयोजित समारोह में गृह मंत्री ने कहा, ‘मैंने कभी अपने जीवन में जाति, वर्ण और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया है. हमें वोट मिलें या नहीं मिलें। हम सरकार बनाएं या नहीं बनाएं। हम जीतें या हारें। लेकिन हम लोगों के बीच भेदभाव नहीं करेंगे। यही हमारे प्रधानमंत्री का कहना है।’

सिंह ने कहा कि बिना प्रेम के कोई भी सत्ता और शासन में नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, ‘कोई भी प्रेम से ही शासन कर सकता है। कोई दूसरा तरीका नहीं है।’ केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘मैं ईसाई समुदाय को लेकर एक चीज और कहूंगा। हम किसी के खिलाफ आरोप नहीं लगाना चाहते। आपने भी सुना होगा। अगर कोई व्यक्ति किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे ऐसा करना चाहिए। इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर सामूहिक धर्मांतरण शुरू होता है, तो बड़ी संख्या में लोग धर्म बदलना शुरू कर देते हैं, तो यह किसी भी देश के लिए चिंता की बात हो सकती है।’

सिंह ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में अल्पसंख्यक धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग करते हैं। भारत में मैं देखता हूं कि बहुसंख्यक मांग करते हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए। तो यह चिंता की बात है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि लोगों के बीच डर की भावना भरने की कोशिशें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि ‘भाजपा आ गई, अब गड़बड़ होगा। ये होगा, वो होगा। हम डर की भावना भरकर देश नहीं चलाना चाहते। हम विश्वास के साथ देश चलाना चाहते हैं। किसी के अंदर अलगाव की भावना नहीं होनी चाहिए। यही हमारी कोशिश रहेगी।’

केंद्रीय गृह मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि राजग सरकार को बदनाम करने की कोशिशें हो रही हैं। सिंह ने कहा, ‘हाल ही में चर्चों पर पत्थर फेंके गए। कुछ पादरी मेरे पास आये और सुरक्षा मांगी। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि इसमें शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाएगा। मैंने उन्हें सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया। लेकिन विधानसभा चुनावों से एक महीने पहले पथराव शुरू हुआ और इसके एक महीने बाद रुक गया। इस पर आप क्या कहेंगे। यह किसकी साजिश है?’

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