Wednesday, June 29, 2022

NRC पर बोले राजनाथ सिंह – किसी के खिलाफ नहीं होगी जबरदस्ती की कार्रवाई

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असम के एनआरसी मुद्दे पर मचेे सियासी घमासान पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि एनआरसी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। उन्‍होंने साफ किया कि इस मामले में जो लोग छूट गए हैं, उनके खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि यह 40 लाख परिवार नहीं हैं, बल्कि ये व्‍यक्तियोंं की संंख्‍या हैै।

उन्‍होंने साफ किया कि एनआरसी में कोई भेदभाव ना तो हुआ है और ना ही किया जाएगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि जिसे एनआरसी में नाम जुड़वाना है उसे सर्टिफिकेट पेश करना होगा। एनआरसी को लेकर हम शांति और सौहार्द बनाकर रखेंगे। 1971 से पहले के दस्‍तावेज दिखाने पर एनआरसी में नाम आ जाएगा। मामले में अनावश्‍यक डर फैलाने की कोरिश की गई है।

बता दें कि देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है।  जिसके तहत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का दूसरा ड्राफ्ट सोमवार को जारी किया गया। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेख ने सोमवार को बताया कि 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार छह सौ सात लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर उन्हें शामिल किया गया है और 40.07 लाख आवेदकों को इसमें जगह नहीं मिली है।

NRC में 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्‍य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुताबिक, जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक होगा।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी की प्रक्रिया 1985 में असम समझौते के जरिये तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में शुरू हुई थी। इसको अपडेट करने का निर्णय 2005 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था।

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