दौसा | देश की केंद्र और राज्य सरकार गरीब एवं पिछड़ा लोगो को आगे लाने के लिए कई योजनाये चला रही है. इनमे मनरेगा से लेकर राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा कानून शामिल है. जहाँ मनरेगा के जरिये गरीबो एवं पिछडो को 100 दिन का रोजगार दिया जाता है वही राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सभी गरीब परिवारों को राशन वितरित किया जाता है. हालांकि इन सब योजनाओं को लागू कर सरकार उन पर कोई एहसान नही कर रही है.

बल्कि देश के लोगो से जो टैक्स सरकार वसूलती है उनका उपयोग गरीब लोगो के उत्थान में करना उनकी जिम्मेदारी है. लेकिन राजस्थान की बीजेपी सरकार आजकल गरीबो के साथ कुछ ऐसा ही बरताव् कर रही है, जैसे इन योजनाओ का लाभ गरीब परिवारों को देकर उन पर कोई उपकार कर रही हो. दरअसल राजस्थान में प्रशासन ने उन परिवारों के घरो के बाहर ‘मैं गरीब हूँ’ का बोर्ड टांगना शुरू कर दिया है जो सरकार की योजनाओं का लाभ उठा रहे है.

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राजस्थान के दौसा जिले की सिकराय और बंदीकुई तहसील के करीब 50 हजार घरो के बाहर जिला प्रशासन की और से लिखा गया है की मैं बेहद गरीब हूँ और सरकार की और मदद लेता हूँ. सरकार की तरफ से गरीब परिवारों की गरीबी का प्रचार करते ये बोर्ड आजकल चर्चा का विषय बने हुए है. खुद उन परिवारों के लिए भी यह बेहद शर्मिंदगी का विषय बन गयी है जिनके घर के बाहर यह सब लिखा गया है.

लेकिन मजबूरी में लोग अधिकारियो को ऐसा करने से रोक भी नही रहे है. क्योकि प्रशासन का आदेश है की जो भी शख्स ऐसा करने से रोके उसकी सरकारी मदद रोक दी जाए. इसलिए सरकारी राशन लेने के लिए गरीबो को यह शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ रही है. हालाँकि प्रशसान का कहना है की उन्होंने अपात्र लोगो को सरकारी मदद लेने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है.

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