Tuesday, January 25, 2022

रेलवे भी झेल रहा आर्थिक मंदी की कड़ी मार, 4000 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

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आर्थिक मंदी की मार से रेलवे भी अछूता नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में यात्री भाड़े से होने वाली आय में 155 करोड़ रुपये और माल भाड़े में 3,901 करोड़ रुपये की कमी आई है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी से खुलासा हुआ कि 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल – जून) में यात्री किराये से 13,398.92 करोड़ रुपये की आय हुई थी। यह आय जुलाई-सितंबर तिमाही में गिरकर 13,243.81 करोड़ रुपये रह गई।इसी प्रकार, भारतीय रेल को माल ढुलाई से पहली तिमाही में 29,066.92 करोड़ रुपये की कमाई हुई जो कि दूसरी तिमाही में काफी कम होकर 25,165 करोड़ रुपये रह गई।

मध्य प्रदेश में नीमच के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्र शेखर गौड़ की ओर से दायर आरटीआई आवेदन पर मिले जवाब में पता चला कि आर्थिक सुस्ती की वजह से टिकट की बुकिंग भी प्रभावित हुई। पिछले साल अप्रैल-सितंबर के मुकाबले 2019-20 की इसी अवधि में बुकिंग में 1.27 प्रतिशत की गिरावट आई है।

रेलवे ने आर्थिक नरमी से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं. उसने हाल ही में व्यस्त समय में माल ढुलाई पर अधिभार हटा लिया है और एसी चेयर कार तथा एक्जिक्यूटिव क्लास सिटिंग वाली ट्रेनों के किराए में 25 प्रतिशत छूट की पेशकश की है।

इसके अलावा, 30 साल से पुराने डीजल इंजन को हटाने की पहल शुरू करना, ईंधन बिल में कटौती, किराये के अतिरिक्त राजस्व के विकल्प सृजित करना और भूमि को किराये पर देने या बेचने जैसे कदम उठाए हैं। रेलवे बार्ड ने पिछले महीने सभी 17 मंडलों को सुस्ती से निपटने के लिए उपाय करने को कहा है।

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