नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत एक बहुत बड़ी आर्थिक तबाही का सामना कर रहा है और इसके समाधान के लिए सरकार को विपक्ष के विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय अकेले ये काम नहीं कर सकता है. उन्होने केंद्र सरकार के आर्थिक राहत पैकेज को भी अपर्याप्त बताया.

उन्होंने कहा कि पैकेज प्रवासी मजदूरों को खाद्यान्न देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें इसके साथ ही सब्जी और तेल की जरूरत भी पड़ेगी और उन्हें किराया भी देना है, लिहाजा, उन्हें पैसे मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीनों से लोग बेरोजगार हो गए है। उन्हें सिर्फ अन्न सुविधा नहीं चाहिये थी, बल्कि पैसे की मदद सबसे ज्यादा थी। ताकि वे रोजमर्रा की जिंदगी के जरुरतों को पूरा कर सकें। लेकिन अफसोस की बात है कि मौजूदा सरकार लोगों के इस जरुरत से आंखें मूंद ली है। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि लोगों को पैसे की सहायता राशि मिलती तो ज्यादा अच्छा होता।

उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक आपदा से जूझ रही है। इस समय हर संसाधन अपर्याप्त साबित होगा। उन्होंने कहा कि विशेष तौर से भारत के मामले में मुझे ऐसा लगता है। हमारी आर्थिक वृद्धि सुस्त पड़ चुकी है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए और बहुत कुछ करने की जरूरत है।

हमें सभी प्रयास करने होंगे।  हालांकि, इसके साथ ही राजन ने कहा कि पैकेज के कुछ अच्छे बिंदु हैं, लेकिन  हमें अधिक करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रकोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित कंपनियों और लोगों को राहत के लिए तरीके ढूंढे जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमें अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को ठीक करने की जरूरत है, जिन्हें ‘मरम्मत’ की जरूरत है। इनमें बैंकों सहित कुछ बड़ी कंपनियां और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) शामिल हैं। हमें ऐसे सुधारों की जरूरत है जिसमें किसी तरह का प्रोत्साहन हो, और सुधार आगे बढ़ सके। हमें सुधारों की जरूरत है।

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