Monday, September 27, 2021

 

 

 

रघुराम राजन की चेतावनी – पूंजीवाद ‘खतरे’ में, लोगों को नहीं मिल रहे समान अवसर

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नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि पूंजीवाद के समक्ष गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ विद्रोह खड़ा हो सकता है क्योंकि आर्थिक एवं राजनीतिक प्रणाली में लोगों के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में प्रोफेसर राजन ने बीबीसी रेडियो 4’ एस टुडे कार्यक्रम में बताया कि अर्थव्यवस्था के बारे में विचार करते समय दुनिया भर की सरकारें सामाजिक असमानता को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, ‘मेरा मानना है कि पूंजीवाद गंभीर खतरे में है क्योंकि इसमें कई लोगों को अवसर नहीं मिल पा रहे हैं और जब ऐसा होता है तो पूंजीवाद के खिलाफ विद्रोह खड़ा हो जाता है.’

इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि मेरी समझ से पूंजीवाद कमजोर पड़ रहा है क्‍योंकि यह लोगों को बराबर अवसर नहीं दे रहा है. वास्तव में जो लोग पूंजीवाद से  प्रभावित हो रहे हैं, उनकी स्थिति बिगड़ी है. राजन ने सलाह देते हुए कहा कि संसाधनों का संतुलन जरूरी है. हर किसी को अपनी पसंद से कुछ भी चुनने की आजादी है. वास्तव में जरूरत इस बात की है कि अवसरों की स्थिति में सुधार हो. उन्‍होंने कहा कि 2008 की आर्थिक मंदी के बाद खासतौर पर स्थिति बदली है.

पूर्व गवर्नर ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले मामूली शिक्षा के साथ मध्यम श्रेणी की नौकरी मिल जाती थी लेकिन 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद स्थिति बदली है.  अगर आपको सफलता हासिल करनी है, तो आपको वास्तव में अच्छी शिक्षा हासिल करने की जरूरत है. वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में बात करते हुए राजन ने कहा कि अगर आप दूसरे के व्यापार पर प्रतिबंध लगाएंगे तो वो आपकी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाएंगे. उन्‍होंने कहा कि सवाल ये है, आप सीमा के पार अपने व्यापार को कैसे चालू रखते हैं और अपनी वस्तुएं वहां कैसे पहुंचाते हैं.

हाल ही में राजन की तीसरी किताब ‘द थर्ड पिलर’ का विमोचन हुआ है. इससे पहले उनकी ‘फॉल्टलाइंस’ और ‘आई डू वॉट आई डू’ लॉन्च हो चुकी है, ये किताबें सितंबर 2013 से सितंबर 2015 के दौरान आरबीआई में उनके कार्यकाल के दौरान संबोधनों का संग्रह हैं.

उन्होंने कहा कि अतीत में मामूली शिक्षा हासिल करके एक मध्यम श्रेणी की नौकरी मिल जाती थी लेकिन 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद स्थिति बदली है और अब अगर आप वास्तव में सफल होना चाहते हैं तो आपको अच्छी शिक्षा की जरूरत है.

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